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जरूरी खबर: रसोई से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और पेंशन तक, आज से भारत में बदल गए ये 11 नियम

Tue, 01 Oct 2019 09:57 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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एक अक्तूबर से भारत में कईं बड़े बदलाव हुए हैं। इन बदलावों का आपकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। इन नए नियमों से जहां एक ओर आपको राहत मिलेगी, वहीं अगर आपने कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा तो आपको आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। इनमें रसोई गैस सिलिंडर के दाम, लोन, पेंशन, जीएसटी काउंसिल का फैसला, ड्राइविंग लाइसेंस, होटल का किराया, आदि शामिल है। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में। 

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महंगा हुआ रसोई गैस सिलिंडर 

एक अक्तूबर से रसोई गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी हो गई है। लगातार दूसरे महीने रसोई गैस के दाम में इजाफा हुआ है, जिससे आम आदमी को झटका लगा है। देश के प्रमुख महानगरों में बिना-सब्सिडी वाला गैस सिलिंडर करीब 15 रुपये महंगा हुआ है। 

गैस सिलिंडर के लिए चुकाने होंगे इतने पैसे 

आज से दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले सिलिंडर के लिए आपको 605 रुपये चुकाने पड़ेंगे। कोलकाता में इसका दाम 630 रुपये है। वहीं मुंबई और चेन्नई में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले सिलिंडर का दाम क्रमश: 574.50 और 620 रुपये है। वहीं, 19 किलोग्राम सिलिंडर की कीमत दिल्ली में 1085 रुपये हो गई है। कोलकाता में 1139.50 रुपये, मुंबई में 1032.50 रुपये और चेन्नई में इसका दाम 1199 रुपये है। 

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केंद्रीय कर्मियों की पेंशन का नियम बदला

सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के पेंशन नियमों में बदलाव किया है, जो एक अक्तूबर से लागू हो गया है। पहले केंद्रीय कर्मी की सेवा अगर सात साल पूरी होती है तो उनकी मौत की स्थिति में परिवार को अंतिम वेतन के 50 फीसदी के बराबर पेंशन दी जाती थी। बदलाव के तहत अगर कर्मचारी को लगातार सेवा के सात साल पूरे नहीं हुए हैं, तो भी उसके परिवार को पेंशन का लाभ दिया जाएगा।

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डीएल-आरसी में भी बदलाव

अब पूरे देश में डीएल और आरसी का रूप-रंग बदलने जा रहा है। एक अक्तूबर से पूरे देश में डीएल और गाड़ी के पंजीकरण प्रमाण पत्र का रंग, लुक, डिजाइन और सुरक्षा फीचर एक जैसे होंगे। स्मार्ट डीएल और आरसी में माइक्रोचिप व क्यूआर कोड होंगे, जिससे पिछला रिकॉर्ड छुपाया नहीं जा सकेगा। क्यूआर कोड रीड करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को हैंडी ट्रैकिंग डिवाइस दिया जाएगा। अब हर राज्य में डीएल, आरसी का रंग समान होगा व उनकी प्रिंटिंग भी एक जैसी होगी। इसके अलावा डीएल और आरसी में जानकारियां भी एक जैसी और एक ही जगह पर दी जाएंगी। बदलाव के साथ सरकार सभी वाहनों और चालकों का ऑनलाइन डाटाबेस भी तैयार करेगी।

 

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होम-ऑटो लोन हुआ सस्ता

आरबीआई के रेपो रेट में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एसबीआई ने एक अक्तूबर से अपनी कर्ज की ब्याज दरों को रेपो रेट से जोड़ने का फैसला किया है। इससे ग्राहकों को करीब 0.30 फीसदी तक सस्ती दरों पर होम और ऑटो लोन मिल सकेगा। एसबीआई के अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, निजी क्षेत्र के फेडरल बैंक ने भी एक अक्तूबर से अपनी खुदरा कर्ज की ब्याज दरों को रेपो से जोड़ने का एलान किया है। अभी तक सभी बैंक एमसीएलआर पर आधारित ब्याज दर से कर्ज देते हैं।

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कम हुआ होटल का किराया

होटल के कमरों समेत कई चीजों पर जीएसटी की दरें भी सस्ती हो गईं हैं। 1000 रुपये किराये वाले होटल कमरों पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। 1001 से 7,500 रुपये तक के कमरों पर जीएसटी को 18 से घटाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। इसी तरह, 7,500 रुपये से ऊपर के कमरों पर जीएसटी को 28 से घटाकर 18 फीसदी किया गया है। जीएसटी की नई दरें उन लोगों पर भी लागू होंगी, जिन्होंने एक अक्तूबर के बाद के लिए बुकिंग की है।

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न्यूनतम बैलेंस रखने में राहत

एसबीआई ने मेट्रो शहरों में मासिक न्यूनतम बैलेंस राशि को 5000 से घटाकर 3000 कर दिया है। पूर्ण शहरी इलाकों के खाताधारकों के न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क में भी कमी की है। खाते में तय रकम से यदि बैलेंस 75 फीसदी से कम रहता है तो जुर्माने के तौर पर 80 रुपये और जीएसटी देना होगा। 

खाते में 50 से 75 फीसदी तक बैलेंस रखने वालों को 12 रुपये और जीएसटी और 50 फीसदी से कम बैलेंस होने पर 10 रुपये जुर्माना और जीएसटी अदा करना होगा। साथ ही बैंक ने इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग लेनदेन पर मासिक सीमा को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अपने खाते में 25000 रुपये औसतन मासिक बैलेंस रखने वाले ग्राहक बैंक ब्रांच से दो बार मुफ्त में पैसे निकाल सकते हैं। 

खाते में 25,000 से 50,000 रुपये तक का औसतन मासिक बैलेंस रखने वाले शाखा से मुफ्त में 10 बार पैसे निकाल सकते हैं। खाते में 50,000 रुपये से अधिक और एक लाख रुपये तक रखने वाले ग्राहक बैंक शाखा से असीमित संख्या में पैसे निकाल सकते हैं।

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जीएसटी रिटर्न का नया फॉर्म लागू

पांच करोड़ सालाना से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटी रिटर्न का फॉर्म बदल गया है। ऐसे कारोबारियों को अनिवार्य रूप से जीएसटी एएनएक्स-1 फॉर्म भरना होगा, जो जीएसटीआर-1 की जगह लेगा। छोटे कारोबारी इसी फॉर्म के जरिए जीएसटी रिटर्न फाइल करेंगे। उनके लिए ऐसा करना एक जनवरी 2020 से अनिवार्य होगा। फिलहाल बड़े करदाता अक्तूबर और नवंबर का जीएसटी रिटर्न जीएसटीआर 3बी फॉर्म से भरेंगे।
 

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पेट्रोल डीजल की खरीद पर कैशबैक नहीं

एसबीआई क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल की खरीद पर अब 0.75 फीसदी कैशबैक नहीं मिलेगा। एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी ने कैशबैक स्कीम को वापस लेने को कहा था। केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 2016 में इसकी शुरुआत की थी। एसबीआई की देखादेखी अन्य बैंक भी इसका पालन कर सकते हैं।

छोटे वाहन मालिकों को राहत दी गई है और 10 से 13 सीटों तक के पेट्रोल और डीजल वाले वाहनों से सेस घटा दिया गया है। साथ ही स्लाइड फास्टनर्स (जिप) पर जीएसटी 12 फीसदी कर दिया है।

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सिंगल यूज प्लास्टिक पर लग सकता है प्रतिबंध

दो अक्तूबर से सरकार देश भर में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की तैयारी कर रही है। देश में बढ़ते प्रदूषण को देखते यह कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि सरकार की मंशा इसे स्वच्छ भारत अभियान की तरह जनआंदोलन बनाने की भी है।

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इन पर बढ़ीं जीएसटी की दरें

रेल गाड़ी के सवारी डिब्बे और वैगन पर जीएसटी की दर को पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर जीएसटी 18 फीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी कर दिया गया है। इसमें 12 फीसदी का अतिरिक्त सेस भी लगाया गया है।

 

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कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में बड़ी कटौती की घोषणा की है। जिसके बाद कॉर्पोरेट टैक्स को सरकार ने 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया है। एक अक्तूबर के बाद स्थापित की गई विनिर्माण कंपनियों के पास 15 फीसदी टैक्स भरने का विकल्प होगा। इन कंपनियों पर सरचार्ज के साथ कुल टैक्स 17.01 फीसदी हो जाएगा।

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