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चेक बाउंस से और बढ़ सकती हैं मुश्किलें, आरबीआई ने किया यह बड़ा बदलाव

Tue, 09 Apr 2019 04:07 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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कैशलेस और डिजिटल लेनदेन से चेक से होने वाले भुगतान में कमी आई है। लेकिन इन सबके बीच चेक बाउंस के मामलों में कमी देखने को नहीं मिली है। चेक बाउंस के अपराध में सजा के प्रावधान को और कड़ा किया गया है। इसमें खाता बंद करने के साथ ही चेक बुक को नहीं जारी करना शामिल है। 
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बार-बार बाउंस होने पर यह है नया नियम

आरबीआई ने बैंकों से उन ग्राहकों से सख्ती से पेश आने को कहा है जिनके चेक लगातार बाउंस होते रहते हैं। अब ऐसे ग्राहकों को बैंक नई चेक बुक जारी नहीं करेगा। वहीं चालू खाताधारकों का खाता बंद कर दिया जाएगा। आरबीआई ने बैंकों  से कहा है कि एक वित्तीय वर्ष में चार बार चेक बाउंस होने पर ऐसा प्रावधान किया जाए। 
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तीन महीने के लिए होता है वैध

चेक जारी होने के बाद तीन महीने तक के लिए वैध होता है। अगर तीन महीने से ज्यादा पुराना चेक बैंक के पास जाता है तो फिर उसका भुगतान नहीं होगा। 

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कचहरी में आयोजित लोक अदालत

लोक अदालत में निबटेगा मुकदमा

चेक बाउंस का मुकदमा लोक अदालत में लाने के लिए सरकार कानून में बदलाव करने की सोच रही है। हालांकि इसका फैसला अब 23 मई के बाद लिया जाएगा, जब नई सरकार सत्ता में आएगी। इसके साथ ही मुकदमें का खर्चा भी डिफॉल्टर के ऊपर लगाया जाएगा। 
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चेक बाउंस पर देना पड़ता है भारी जुर्माना

जिस गलती का जिक्र हम कर रहे हैं वो है चेक का बाउंस होना। इस गलती पर बैंक 800 रुपये तक की राशि आपके खाते से काट लेते हैं। चेक बाउंस दो तरीके से होता है। पहला खाते में राशि का कम होना और दूसरा, किसी तरह की तकनीकी गलती का होना जैसे हस्ताक्षर में बदलाव, शब्दों में गलती होना आदि। 
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- फोटो : PTI

अब लागू होगा यह नियम

अदालत में मुकदमा चलने पर पीड़ित पक्ष को नुकसान ना हो, इसलिए 20 फीसदी अंतरिम राशि का 60 दिन के भीतर भुगतान किये जाने की अनिवार्यता होगी। अदालत को चेक जारी करने वाले पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि चेक बाउंस होने पर सजा की व्यवस्था है, लेकिन इस तरह के मामलों में अपील करने का प्रावधान होने के कारण लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

इससे चेक की विश्वसनीयता कम हो रही है और असुविधाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय मिल सकेगा व चेक की विश्वसनीयता और कारोबारी सुगमता बढ़ेगी।
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बैंक वसूलते हैं इतना जुर्माना

चेक बाउंस होने पर बैंक 800 रुपये तक का जुर्माना वसूलते हैं।  एसबीआई 500 रुपये प्लस जीएसटी वसूल करता है। अगर किसी तकनीकी खामी की वजह से चेक रिटर्न हुआ तो बैंक 150 रुपये प्लस जीएसटी का चार्ज लेता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा में एक लाख रुपये तक का चेक तकनीकी कारणों से रिटर्न होने पर 250 रुपये और एक लाख से एक करोड़ तक के चेक के लिए 750 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता है। इसी तरह आईसीआईसीआई, एक्सिस और एचडीएफसी बैंक में भी 500 रुपये से लेकर के 800 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता है। 
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दो साल की हो सकती है जेल 

चेक बाउंस भारत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 में हुए संशोधन के बाद सेक्शन 138 के तहत अपराध माना जाता है। चेक बाउंस होने पर दो साल तक की जेल या चेक में भरी राशि का दोगुना तक जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है। इसके तहत अगर अपर्याप्त बैलेंस के चलते चेक बाउंस होता है तो मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।  
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