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अमेजन, फ्लिपकार्ट की वेबसाइट से गायब हुए 4 लाख से अधिक प्रोडक्ट, ग्राहकों में गुस्सा

Sat, 02 Feb 2019 06:52 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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नई ई-कॉमर्स पॉलिसी के लागू होने के दूसरे दिन ही प्रमुख ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों पर 4 लाख से अधिक प्रोडक्ट गायब हो गए हैं। 
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- फोटो : The Verge

अमेजन पर सबसे ज्यादा मार

अमेजन पर इस फैसले की सबसे ज्यादा मार पड़ी है, जिससे ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्राहक सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ गुस्सा भी जाहिर कर रहे हैं। अमेजन पर सबसे बड़े वेंडर क्लाउडटेल इंडिया, जो कि भारत में उसका साझेदार भी है और अमेजन पैंट्री पर सामान पूरी तरह से गायब हो गए हैं। कंपनी की वेबसाइट पर कई उत्पाद जैसे कि घर का राशन, बच्चों के डायपर, आईफोन आदि की बिक्री के लिए मौजूद नहीं हैं। यह सामान ऐप पर भी नहीं मिल रहे हैं। फ्लिपकार्ट पर भी यही हाल देखने को मिल रहा है। 
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अमेजन, क्लाउडटेल को लगा सबसे बड़ा झटका

अमेजन और उसकी डिलिवरी साझेदारी कंपनी क्लाउडटेल इंडिया को सबसे बड़ा झटका लगा है। क्लाउडटेल अमेजन पर सबसे बड़ा विक्रेता है, जो कि तेज डिलिवरी और स्टॉक कंट्रोल पर नजर रखता है। अमेजन पर मौजूद छोटे व्यापारियों का आरोप है कि उनके उत्पादों को पहले बेचने के बजाए हमेशा बड़े व्यापारियों को तरजीह मिलती है।

क्लाउडटेल इंडिया और अमेजन की 51:49 के अनुपात में साझेदारी है। क्लाउडटेल ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 7149 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था, जो 2016-17 के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा है। 

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नहीं हो सकेगी एक्सक्लूसिव बिक्री

अमेजन व फ्लिपकार्ट आदि पर अब किसी भी उत्पाद की एक्सक्लूसिव बिक्री नहीं हो सकेगी। खुदरा व्यापारियों का बिजनेस लगभग ठप होने की स्थिति आ गई थी। बिक्री ऑनलाइन बढ़ने और खुदरा बाजार का नुकसान होने की संभावना लगातार बढ़ रही थी।
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कंपनियां लगाती थी सेल

दरअसल, कंपनियां बाजार में अच्छी कंपनियों के आने वाले प्रमुख उत्पाद की एक्सक्लूसिव सेल लगाती थीं। इससे एक तरफ उत्पाद निर्माता कंपनी का मुफ्त में प्रचार हो जाता था, तो वहीं ट्रांसपोर्टेशन और अन्य कीमत न होने से ऑन-लाइन कंपनी को उत्पाद का मूल्य कम पड़ता था।

इससे वे बहुत कम मार्जिन पर सामानों की बिक्री करती थीं। इससे उत्पाद निर्माता कंपनी और ऑनलाइन मार्केटिंग करने वाली कंपनी दोनों को अच्छा लाभ हो रहा था। इस वर्ग में खासकर इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचे जा रहे थे।
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- फोटो : अमर उजाला
इससे इन नए उत्पादों को बाद में खुदरा बाजार में आने पर भी बहुत कम ग्राहक उसके पास जा रहे थे। खुदरा व्यापारियों का बिजनेस लगभग ठप होने की स्थिति आ गई थी। इससे बचने के लिए व्यापारियों ने सरकार से गुहार लगाई थी।
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- फोटो : file photo

चार करोड़ खुदरा व्यापारी

देश में खुदरा बाजार बहुत बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग चार करोड़ खुदरा की दुकानें हैं। इनके माध्यम से लगभग चौदह करोड़ लोगों का रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। जीएसटी के कारण पहले ही सरकार से नाराज चल रहे व्यापारी ऑनलाइन कंपनियों पर कोई लगाम न लगाए जाने से भी नाराज चल रहे थे। सरकार ने जीएसटी की दर घटाकर व्यापारियों को मनाने का काम किया था। 
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