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सफलता की कहानी : कंपनी के नाम से प्रसिद्ध हुए ये उत्पाद, हर घर में होता है इनका इस्तेमाल

Tue, 09 Mar 2021 02:10 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कंपनी के नाम से प्रसिद्ध हुए ये उत्पाद - फोटो : अमर उजाला
अपना खुद का कारोबार शुरू करने के लिए सही योजनाओं का कार्यान्वयन होने के साथ सही ब्रांड का चुनाव करना भी अनिवार्य है। मूल रूप से ट्रेडमार्क वो ब्रांड है, जिसका उपयोग कंपनियां अपने उत्पाद को अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान करने के लिए करती हैं। ब्रांड एक ऐसे नाम, डिजाइन अथवा किसी ऐसे विशेष लक्षण को कहा जाता है जो कि किसी एक विक्रेता के उत्पाद को दूसरे से अलग करता हो। लेकिन कई ऐसे ब्रांड हैं जो बेहद प्रसिद्ध हुए हैं। ये कानूनी रूप से संरक्षित ट्रेडमार्क थे, लेकिन आज जेनेरिक शब्द बन गए हैं। इनमें से कुछ उत्पादों को कंपनी के नाम से ही जाना जाता है और इन उत्पादों के बारे में हर कोई जानता है। आइए जानते हैं इन ब्रांड के बारे में।
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डालडा - फोटो : अमर उजाला
डालडा
1930 के दशक में नीदरलैंड की 'डाडा' एंड कंपनी का वेजिटेबल ऑयल भारत आया। तब शुद्ध देसी घी के सस्ते विकल्प के रूप में इसकी बिक्री शुरू हुई। 1937 में डाडा के बीच हिंदुस्तान युनिलीवर लीवर का 'एल' जोड़ा गया तो 'डालडा' अस्तित्व में आया। डालडा का खूब प्रचार किया गया जिससे डालडा शुद्घ घी का बेहद विश्वसनीय विकल्प बन गया। हर घर में डालडा का इस्तेमाल होने लगा। लेकिन आज भी कई लोगों को लगता है कि डालडा घी का नाम है। असल में यह घी नहीं, बल्कि कंपनी का नाम है जो वनस्पति घी बेचती है।
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बैंड एड - फोटो : iStock
बैंड एड
बैंड एड का आविष्कार 1920 में जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने किया। बैंड एड को शुरू में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली। बाजार में अपने पहले वर्ष में कंपनी की केवल 3,000 डॉलर की कमाई हुई थी। लेकिन साल 2001 तक कंपनी 100 अरब बैंड एड्स के निर्माण के प्रभावशाली मील के पत्थर तक पहुंच गई। आज हर घर और दुकान में बैंक एड पाई जाती है। असल में बैंड एड अमेरिकी दवा और चिकित्सा उपकरण कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा वितरित चिपकने वाली पट्टियों का एक ब्रांड है। लेकिन लोगों को ऐसा लगता है कि इन पट्टियों को ही बैंड एड कहा जाता है।

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डेटॉल - फोटो : iStock
डेटॉल 
समय के साथ देश में डेटॉल हाईजीन चाहने वाले परिवारों की तत्काल पहली पसंद बन गया। बीमारियों और संक्रमण की रोकथाम करते हुए डेटॉल देश भर में लाखों माताओं का भरोसेमंद साथी रहा है, जो उनके परिवार की रक्षा करता है। भारत में डेटॉल ब्रांड 1933 में तरल एंटिसेप्टिक के रूप में शारीरिक चोट और घाव के इलाज के लिए लॉन्च किया गया था। लगभग पहले 50 वर्ष यह केवल एंटीसेप्टिक लिक्विड के तौर पर उपस्थित रहा। लेकिन डेटॉल किसी एंटीसेप्टिक लिक्विड का नाम नहीं, बल्कि यूके के एक ब्रांड का नाम है। बाजार में डेटॉल कंपनी के साबुन, हैंडवॉश और अन्य उत्पाद भी उपलब्ध हैं।
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थर्मस - फोटो : iStock
थर्मस 
किसी भी वैक्यूम फ्लास्क को थर्मस कहा जाता है लेकिन यह मूल रूप से थर्मस बोतल कंपनी द्वारा निर्मित फ्लास्क के लिए एक ट्रेडमार्क था। लेकिन यह शब्द इतनी बार इस्तेमाल किया गया कि साल 1963 में यह शब्द सामान्य घोषित हो गया और कंपनी ने इसपर ट्रेडमार्क खो गया।

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'जेसीबी की खुदाई' - फोटो : iStock
'जेसीबी की खुदाई' 
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर 'जेसीबी की खुदाई' खूब ट्रेंड किया था। जेसीबी मीशन के साथ मीम्स बने। यूट्यूब पर भी जेसीबी मशीन के वीडियोज को लाखों लोगों ने देखा। आज कई लोगों को ऐसा लगता है कि जेसीबी उस पीली मशीन का नाम है जो खनन और निमार्ण कार्यों में प्रयोग की जाती है। लेकिन असल में जेसीबी किसी मशीन का नाम नहीं, बल्कि मशीन बनाने वाली एक कंपनी का नाम है। जेसीबी का पूरा नाम जोसेफ सिरिल बैंफर्ड (Joseph Cyril Bamford) है और सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस पीले रंग की मशीन का असली नाम बेकहो लोडर (Backhoe loader) है। जेसीबी के अतिरिक्त भी कई ऐसी कंपनियां हैं जो ये बैकहो लोडर मशीन बनाती हैं। 
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