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जनता परेशान: लगातार बढ़ रहा पेट्रोल-डीजल का दाम, जानिए सरकार ने कब-कब बढ़ाया टैक्स

Tue, 16 Feb 2021 04:28 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेट्रोल-डीजल का दाम - फोटो : अमर उजाला
सरकारी तेल कंपनियों ने आज लगातार आठवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमत में वृद्धि की है। रोजाना बढ़ती तेल की कीमत नए-नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। आसमान छूती तेल की कीमतों से जनता भी परेशान है। तेल महंगा होने का मामला राज्यसभा में भी उठा। देश में पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जितना ज्यादा होता है, उसकी कीमत भी उतनी ही ज्यादा है। अगर कभी यह सस्ता होता भी है, तो भी हमारी जेब पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता क्योंकि यह गिरावट काफी कम होती है और टैक्स काफी ज्यादा। 

ग्राहक पेट्रोल व डीजल के बेस प्राइस यानी एक्स फैक्टरी का लगभग तीन गुना ज्यादा देते हैं। आइए जानते हैं तेल आपको इतना महंगा कैसे पड़ता है, इनमें कौन-कौन से खर्च शामिल हैं।
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पेट्रोल-डीजल की कीमत - फोटो : अमर उजाला
31 रुपये के पेट्रोल के लिए आप देते हैं 89 रुपये
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में कमी के बावजूद हमारे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत कम नहीं होती। 

 


16 फरवरी को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत
 
बेस प्राइस/एक्स फैक्ट्री कीमत 31.82 रुपये
फ्रेट (ढुलाई खर्च) 0.28 रुपये
एक्साइज ड्यूटी 32.90 रुपये
डीलर का कमीशन 3.68 रुपये
VAT (डीलर के कमीशन के साथ) 20.61 रुपये
आपके लिए दाम 89.29 रुपये
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पेट्रोल-डीजल - फोटो : iStock
16 फरवरी को दिल्ली में एक लीटर डीजल की कीमत
 
बेस प्राइस/एक्स फैक्ट्री कीमत 33.46 रुपये
फ्रेट (ढुलाई खर्च) 0.25 रुपये
एक्साइज ड्यूटी 31.80 रुपये
डीलर का कमीशन 2.51 रुपये
VAT (डीलर के कमीशन के साथ) 11.68 रुपये
आपके लिए दाम 79.70 रुपये

दरअसल भारत में तेल पर केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न तरह के टैक्स बहुत ज्यादा हैं। ग्राहकों से तेल पर सेस भी वसूला जाता है। इसी वजह से हमारे देश में तेल के दाम इतने ज्यादा हैं। आइए जानते हैं कि मोदी सरकार ने कब-कब तेल पर टैक्स बढ़ाया।

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पेट्रोल-डीजल की कीमत - फोटो : पीटीआई
मोदी सरकार ने कब-कब बढ़ाया टैक्स? 
  • साल 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर था और डीजल पर 3.56 रुपये। 
  • नवंबर 2014 से जनवरी 2016 तक केंद्र सरकार ने इसमें नौ बार इजाफा किया। 
  • सिर्फ 15 सप्ताह में पेट्रोल पर ड्यूटी 11.77 और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर बढ़ी। इसकी वजह से 2016-17 में सरकार को 2,42,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो 2014-15 में 99,000 करोड़ रुपये थी। 
  • बाद में अक्तूबर 2017 में यह दो रुपये कम की गई। हालांकि इसके एक साल बाद ड्यूटी में फिर से 1.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया। 
  • इतना ही नहीं, जुलाई 2019 में यह एक बार फिर दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गई।
  • केंद्र सरकार ने 16 मार्च 2020 और पांच मई 2020 को दो किस्तों में पेट्रोल पर एक्साइज 13 रुपये और डीजल पर 16 रुपये बढ़ाई। हालांकि इस बढ़ोतरी से तेल की कीमत प्रभावित नहीं हुई थी क्योंकि तब कई देशों में लगे लॉकडाउन से कच्चे तेल की मांग बेहद कम हो गई थी और दाम में भारी गिरावट आई थी। 
  • इस बीच राज्य सरकारों ने भी कोरोना काल में घटते राजस्व की भरपाई के लिए वैट की दरें बढ़ाईं। दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई अन्य राज्यों ने वैट में बढ़ोतरी की थी। 
आगे जानते हैं कि पिछले आठ दिनों से देश में तेल की कीमत क्यों बढ़ रही है।
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पेट्रोल-डीजल की कीमत - फोटो : iStock
वैश्विक बाजारों में आई तेजी से कीमत प्रभावित हुई है। इसके साथ ही राज्यस्तरीय करों को मिला कर ईंधन की खुदरा कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। राजस्थान में पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट की दरें सबसे अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर खुदरा ईंधन की बिक्री पर भी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 60 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल का भाव महंगा हो गया है।

एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल
कोरोना काल में भी चीनी अर्थव्यवस्था आश्चर्यजनक ढंग से विकास कर रही है, जिसकी वजह से वहां जनवरी में कच्चे तेल का आयात हर प्रतिदिन 111.2 लाख की दर से बढ़ा है। यह आंकड़ा दिसंबर की तुलना में 18 फीसदी ज्यादा है। जिस ढंग से इस समय पड़ोसी देश कच्चे तेल का आयात बढ़ा रहा है, इसमें और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसकी वजह से सोमवार को कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के संकेत मिले। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत साल भर के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 63.74 डॉलर प्रति बैरल तक गई, जो 23 जनवरी 2020 से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 

आगे जानते हैं कि तेल की कैसे तय होती है और आप अपने शहर में का दाम कैसे देख सकते हैं।
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पेट्रोल - फोटो : ANI
कैसे तय होती है तेल की कीमत?
प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।

जानिए आपके शहर में कितना है दाम
पेट्रोल-डीजल की कीमत आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा। हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा।
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