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तिरुपति मंदिर के पास 7 टन सोना, 30 टन चांदी

Mon, 04 Jul 2016 01:37 PM IST
शिल्पा कन्नन/ बीबीसी न्यूज़
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- फोटो : BBC
चाहे त्योहारों के दौरान खरीददारी हो, शादी में उपहार के रूप में तोहफा देना हो या फिर धार्मिक उत्सवों में दान करना हो – भारतीय लोगों को सोना बेहद पसंद है। माना जाता है भारत में लोगों के घरों, कारोबार और मंदिरों के खजाने में करीब 20,000 टन सोना जमा है। लेकिन इस कीमती धातु की वजह से देश का आयात बिल भी बढता है।
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इसकी वजह ये है कि सरकार सोने की जरूरत पूरी करने के लिए उसका आयात करती है । लेकिन देश में लोगों के घरों और मंदिरों में पडा सोना अर्थव्यव्स्था में इस्तेमाल नहीं हो पाता। इसीलिए सरकार अब इस जमा सोने को अर्थव्यवस्था में वापस लाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है।
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सरकार की योजना निजी तौर पर जमा सोने को निकालकर अर्थव्यवस्था में लाने की है और इसमें धनवान हिंदू मंदिर अहम भूमिका निभा सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में एक खरब डॉलर मूल्य का सोना लोगों के निजी लॉकरों में जमा है।
 

तिरुपति मंदिर के पास 7 टन सोना, 30 टन चांदी

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- फोटो : BBC
तिरुमला तिरुपति मंदिर देश का सबसे अमीर मंदिर है जिसके पास सात टन सोना है और श्रद्धालु हर दिन और भी सोना ला रहे हैं। कल्पना कीजिए कि भारत के सभी मंदिरों में कितने टन सोना होगा?
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श्रद्धालु मंदिर के दान पात्र में अरबों डॉलर की नकदी और जेवरात डालते हैं जिसमें सोना प्रमुखता से होता है। तिरुपति ऐसा पहला मंदिर है जिसने सरकार की योजना में भागीदारी की है। सरकार को दिए सोने पर मंदिर को ब्याज की प्राप्ति होती है। मंदिर के न्यास तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने पंजाब नेशनल बैंक में करीब 1।3 टन सोना जमा किया है। स्टेट बैंक में निवेशित एक टन सोने को भी ट्रस्ट इसी मकसद से शिफ्ट करने जा रहा है।
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मंदिर न्यास ने करीब डेढ़ टन सोना इंडियन ओवरसीज बैंक में भी रखा है। मंदिर के अधिकारियों के मुताबिक गोल्ड डिपॉजिट स्कीम (जीडीएस) के तहत साढे चार टन सोना जमा है जिससे ब्याज के रूप में मंदिर को हर साल अस्सी किलो सोने की कमाई होती है। मुंबई के श्रीसिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने भी कहा है कि वो करीब 45 किलो सोना इस योजना के तहत जमा करेगा। कई अन्य मंदिर भी इस योजना का लाभ उठाने की सोच रहे हैं।
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क्या है स्वर्ण विमुद्रीकरण योजना (जीएमएस)?
जीएमएस के तहत रिजर्व बैंक किसी को भी सोना या जेवर बैंक में जमाकर ब्याज कमाने की अनुमति देता है। इस योजना के तहत व्यक्ति, न्यास और म्युचुअल फंड बैंकों में सोना जमा कर सकते हैं। इस योजना का लाभ उठान के लिए न्यूतनत 30 ग्राम सोना जमा करना होता है। सोना जमा करने की कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं की गई है। बैंकों में जमा सोने का ब्याज सोने के रूप में भी वसूल किया जा सकता है।

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जीएमएस के तहत सोना जमा कैसे होता है?
न्यूनतम 30 ग्राम सोना जमा करने का प्रावधान कर छोटे निवेशकों को भी प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है। कोई भी व्यक्ति पैन कार्ड, आधार कार्ड के साथ सोने की टूटी चूडियां और हार लेकर निर्धारित बैंक में जमा करा सकता है। इसके बाद बैंक निवेशक को एक चिट्ठी देता है जिसे लेकर सोने की शुद्धता के लिए जांच केंद्र में जाना होता है। शुद्धता की जांच और सोना जमा करने के कई केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में निवेशक के सामने ही सोने की शुद्धता की जांच की जाती है और फिर एक सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर बैंक जीएमएस अकाउंट खोलता है।

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बैंक सोने का ब्याज कैसे निर्धारित करता है?

जमा सोने को बैंक लघु अवधि डिपॉजिट स्कीम के तहत एमएमटीसी (मेटल एंड मिनरल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) को सोने के सिक्के ढालने के लिए बेच सकता है या उधार दे सकता है। बैंक जमा सोने को सुनारों को भी, निवेशक को दिए जानेवाले ब्याज दर से थोडे ऊंचे दर पर, उधार दे सकता है। बैंक में जेवर, सिक्के या बार के रूप में सोना जमा किया जा सकता है। इस सोने पर वजन के आधार पर ब्याज दिया जाता है और समय के साथ सोने के भाव में बढोतरी का लाभ भी निवेशक को मिलता है। ब्याज की दर संबंधित बैंक ही निर्धारित करता है।

निवेश की अवधि क्या है?
बैंक एक से तीन साल की लघु अवधि के लिए, पांच से सात साल की मध्यावधि के लिए और 12 से 15 साल की दीर्घावधि के लिए सोना स्वीकार कर सकते हैं।
लघु अवधि के लिए बैंक सोना अपने खाते में जमा कर सकते हैं, लेकिन मध्यावधि और दीर्घावधि के लिए बैंक सरकार की ओर से सोने का निवेश स्वीकार कर सकते हैं।
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सोना वापस कैसे होता है?
सोने के निवेशक को लौटाए जानेवाले मूलधन और ब्याज की कीमत सोने में ही लगाई जाती है।मिसाल के तौर पर अगर कोई व्यक्ति सौ ग्राम सोना जमा करता है और उसे एक प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है तो अवधि पूरी होने पर 101 ग्राम सोना उसके खाते में आ जाएगा। सोने से होनेवाली आय कैपिटल गेन्स टैक्स, संपत्ति कर और आय कर से मुक्त होती है। जमा सोने के मूल्य में होनेवाली बढोतरी और मिलने वाले ब्याज पर भी कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है।

Published By Rahul Sankrityayan
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