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उद्योग जगत को आस: अर्थव्यवस्था 2025-26 में 7.9% तक की मजबूत रफ्तार से बढ़ेगी; ग्रांट थॉर्नटन सर्वे में अनुमान

Thu, 30 Jan 2025 09:00 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो

सार

उद्योग जगत को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 में अर्थव्यवस्था 7.9% तक की मजबूत रफ्तार से बढ़ेगी। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र ने कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए 6.6 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है।
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सीएमआईई रिपोर्ट के अनुमान - फोटो : अमर उजाला
उद्योग जगत को उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था 7.9 फीसदी तक की मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ेगी। इसे उन्नत प्रौद्योगिकी और कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने के लिए किए गए सुधारों से समर्थन मिलेगा। ग्रांट थॉर्नटन की ओर से कराए गए बजट पूर्व सर्वे के मुताबिक, उद्योग जगत के अधिकतर लोग भारत के आर्थिक परिदृश्य को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि दर 6 फीसदी से 6.9 फीसदी के बीच रह सकती है। करीब 22 फीसदी लोगों ने 7.0-7.9 फीसदी की सीमा में मजबूत वृद्धि दर की उम्मीद जताई है।

उद्योग जगत का मानना है कि सरकार ने अब तक जो सुधार किए हैं, उनका सकारात्मक असर अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में दिखेगा। राजकोषीय नीतियों को इन प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर आगामी बजट आर्थिकी में समानता और दक्षता सुनिश्चित करते हुए वृद्धि के लिए उत्प्रेरक का कार्य कर सकता है। यह सर्वे विभिन्न उद्योगों के 155 से अधिक लोगों से बातचीत पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र ने कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए वृद्धि अनुमान को 6.6 फीसदी पर बरकरार रखा है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
6.4 फीसदी आर्थिक वृद्धि के लिए राजकोषीय व मौद्रिक नीति में बदलाव की जरूरत : मूडीज
मूडीज एनालिटिक्स ने बुधवार को कहा, रुपये में गिरावट, घटते विदेशी निवेश और अस्थिर महंगाई के बीच भारत को 2025 में 6.4 फीसदी की जीडीपी वृद्धि हासिल करने के लिए अपनी राजकोषीय एवं मौद्रिक नीति में बदलाव करने होंगे। साथ ही, विश्लेषक फर्म ने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2025-26 का बजट घरेलू मांग खासकर निवेश का समर्थन करेगा और राजकोषीय घाटे को 4.5 फीसदी से कम रखने का लक्ष्य रखा जाएगा।
  • मूडीज एनालिटिक्स में सह-अर्थशास्त्री अदिति रमण ने कहा, भारत 2025 में मुश्किल हालात का सामना कर रहा है। रुपये में आ रही कमजोरी, घटता विदेशी निवेश और अस्थिर महंगाई सबसे बड़े आर्थिक जोखिम वाले क्षेत्र हैं।
  • ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने से घरेलू मांग कम होगी। अमेरिका में भारतीय आयातों पर शुल्क बढ़ने से निर्यात परिवेश चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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स्वास्थ्य बीमा - फोटो : ANI
स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी घटाने की मांग
सर्वे में शामिल 84 फीसदी लोगों ने स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी घटाने का समर्थन किया। 68 फीसदी ने एसएमई ऋण और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन के विस्तार की उम्मीद जताई है। करीब 13 फीसदी लोगों ने अनुसंधान और विकास के लिए नए कर प्रोत्साहन उपाय शुरू करने की वकालत की।
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