मनमोहन सिंह (फाइल फोटो)
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मनमोहन सिंह कर देते थे वाह-वाह करने पर मजबूर
बेहद कम बोलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जब देश के वित्त मंत्री हुआ करते थे, तब वह भी अपनी शानदार शेरो-शायरी से वाह-वाह करने पर मजबूर कर देते थे। साल 1991-92 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बजट पेश करने के दौरान एक शेर के जरिए भारत की एतिहासिकता और किसी भी परिस्थति का डटकर मुकाबला करने की भावना को बताया था। उन्होंने कहा था-'यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नामोनिशान हमारा।'
इसके बाद अगले साल 1992-93 में उन्होंने सदन में पढ़ा 'तारीखों में ऐसे भी मंजर हमने देखे हैं, कि लम्हों ने खता की थी,और सदियों ने सजा पाई।'