इस्तेमाल की गई कारों से भरे विशाल मैदान में जंबू कुमार तेजी से अपनी नजरें इधर उधर दौड़ा रहे हैं। उन्हें मर्सिडीज बेंज सीडान की तलाश है। 29 साल के जंबू कुमार के घर में छह साल पहले तक कोई कार नहीं थी। ऑटोमोबाइल के स्पेयर पार्ट्स का छोटा सा कारोबार करने वाले जंबू कुमार ने 2009 में स्कोडा कार खरीदी थी। वे परिवार के पहले शख्स थे, जिसने कार खरीदी। जब उन्हें अपने दोस्तों से मालूम हुआ कि चेन्नई में बीते साल आई बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कारों की बिक्री हो रही है, वे खुद को वहां तक पहुंचने से नहीं रोक पाए।
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'यहां करोड़ों की कार हजारों में बिक रही है'
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कारों में जंबू की खूब दिलचस्पी है और उनका सपना मर्सिडीज बेंज खरीदने का रहा है, लेकिन उनके पास कभी उतने पैसे नहीं रहे। लेकिन बाढ़ में क्षतिग्रस्त, इस्तेमाल हुई कारों की नीलामी के चलते उनका सपना पूरा होने वाला है। वे दस लाख रुपये की बजट के साथ नीलामी में आए हैं। जंबू कुमार कहते हैं, “मेरी पत्नी ने मुझसे कहा है कि मर्सिडीज लेकर ही लौटना। इसलिए मैं यहां मर्सिडीज तलाश रहा हूँ। अगर मेरे पिता जीवित होते तो मुझ पर काफी गर्व करते।” जबूं कुमार के अलावा यहां दूसरे लोग भी पहुंचे हैं, जिनमें पुरानी कारों की ख़रीद बिक्री करने वाले डीलर, कार को किराए पर देने वाले ऑपरेटर शामिल हैं। इनके सामने नीलामी के लिए सैकड़ों कार मौजूद हैं। इनमें हैचबैक, सीडान कारों के अलावा जगुआर, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी लग्जरी कारें भी शामिल हैं।
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'यहां करोड़ों की कार हजारों में बिक रही है'
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इनमें से कई गाड़ियां अभी भी कीचड़ में सनी हैं। कई गाड़ियों की इंटीरियर अस्त व्यस्त है। करीब दो महीने पहले चेन्नई में आई इस सदी के सबसे भयावह बाढ़ में हजारों कारें बर्बाद हो गईं।अब ये कारें ही कई लोगों के सपने को परवान दे रही हैं। चेन्नई से करीब एक हजार किलोमीटर दूर स्थित पुणे में एक ऑटोमोबाइल रिपेयर वर्कशाप चलाते हैं ज्योतिराम चौगले। चौगले के ग्राहकों ने जब इस नीलामी के बारे में सुना तो उन्होंने चौगले को चेन्नई के विमान पर चढ़ा दिया। उन तीनों ने अख़बारों में कहीं पढ़ा था कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त 2012 मॉडल की पोर्श
केयने की नीलामी महज पांच लाख रुपए में हुई थी।
चौगले ने बताया, “मैं अपने ग्राहकों के लिए लग्जरी कार की तलाश में आया हूँ- जगुआर, रेंज रोवर, पोर्शे और दूसरी कारें।” लेकिन जिस दिन चौगले नीलामी में शामिल होने आए हैं, उस दिन कोई पोर्शे मौजूद नहीं थी। उन्होंने जगुआर और ऑडी जैसी कारों की तस्वीर अपने ग्राहकों को व्हाट्सऐप के जरिए भेजीं।चौगले बताते हैं, “मैं काफी उधेड़बुन में हूँ। मैंने कभी इस शहर को नहीं देखा। मैं किसी नीलामी में भी नहीं गया। लेकिन मैं यहां अपने ग्राहकों के लिए कार लेने आया हुआ हूँ।” एक अनुमान के मुताबिक, इस बाढ़ में करीब 40 हजार गाड़ियां बर्बाद हुई हैं।