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दुनिया का वो रहस्यमय रेगिस्तान, जिसकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझा सके वैज्ञानिक

Wed, 15 Apr 2020 09:03 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
रेगिस्तान हमारी धरती के एक तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं। सहारा या रुब-अल खाली जैसे बड़े रेगिस्तानों के बारे में आपने कहीं ना कहीं पढ़ा जरूर होगा। हो सकता है कि सऊदी अरब, मिस्र, मंगोलिया, नामीबिया, मोरक्को, ओमान के रेगिस्तान कभी देखे भी हों। अगर नहीं तो भारत-पाकिस्तान के बीच फैले थार के रेगिस्तान के दीदार ही किए हों। लेकिन आज हम आपको दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान की कहानी बताएंगे।
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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
कनाडा के युकोन सूबे में कारक्रॉस डेजर्ट नाम का एक छोटा-सा रेगिस्तान है। इसका रकबा महज एक वर्ग मील का है जिसे कदमों से भी मापा जा सकता है। इस रेगिस्तान के पास ही बसा कारक्रॉस गांव करीब 4500 साल पहले आबाद हुआ था। यहां इस वक्त कुल जमा 301 लोग रहते हैं। स्थानीय निवासी कीथ वॉल्फ स्मार्च का कहना है कि ये जगह यहां के लोगों के लिए भी एक पहेली है। कीथ लकड़ी पर नक्काशी का काम करते हैं और यहां की प्राकृतिक छटा उन्हें अपने काम में नए-नए तजुर्बे करने की प्रेरणा देती है। क्रॉस रिवर के किनारे बहुत तरह की दुर्लभ वनस्पतियां हैं, लेकिन इनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
कारक्रॉस डेजर्ट काफी ऊंचाई वाले इलाके पर है। सदियों तक ये इलाका लोगों की जानकारी के बाहर था। अब से करीब 4500 साल पहले यहां बैनेट और नारेस झीलें आपस में मिलती थीं और कुदरती तौर पर एक पुल बन गया था। इस पुल के सहारे ही लोगों ने पलायन करना शुरू किया और यहां कारक्रॉस गांव बसा। इस डेजर्ट का नाम कारक्रॉस ही क्यों पड़ा, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
दरअसल, पुल बनने के बाद कारिबू नाम की जंगली जनजाति के झुंड यहां आकर बसने लगे। इन्हीं के साथ नताशाहीन नदी के नजदीक शिकार के मकसद से तिलिंगित और तागिश नाम के घुमंतू कबीले आकर बसने लगे। लिहाजा कारिबू और क्रॉसिंग शब्दों के आवाजों को मिलाकर इस जगह का नाम कारक्रॉस रख दिया गया।

कारक्रॉस तक जो भी पहुंचा है उसने यहां सफेद रंग से सजे पुराने चर्च, एक जरनल स्टोर, पुरानी जंग लगी कुल्हाड़ियां और बारहसिंघों के सींगों से सजे कुछ केबिन जरूर देखे होंगे। ये सब चीजें क्लॉनडिक दौर की हैं। ये वौ दौर था जब डॉसन सिटी और अटलिन के पास लोग सोने की खुदाई के लिए आते थे। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। कारक्रॉस डेजर्ट को अब एडवेंचर प्लेग्राउंड के तौर पर विकसित किया जा चुका है। हर हफ्ते यहां बड़ी संख्या में एडवेंचर प्रेमी आते हैं। गर्मी के मौसम में एक तरफ यहां बाइक प्रेमी अपना शौक पूरा करने आते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ये जगह पहाड़ी बकरियों, हिरणों, और डैल भेड़ के लिए पनाहगाह भी बनती है। सर्दी के मौसम में यहां बर्फ खूब पड़ती है और रेत पर जमा बर्फ का मजा लेने वालों की संख्या बढ़ जाती है।
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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
कारक्रॉस डेजर्ट सिर्फ सैलानियों का ही गढ़ नहीं बल्कि कनाडा के वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के लिए रिसर्च सेंटर भी है जो ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पूरे बर्फीले इलाके में ये छोटा-सा रेगिस्तान कैसे बन गया। युकोन जियोलॉजिकल सर्वे की भूवैज्ञानिक पनाया लिपॉस्की का कहना है कि कारक्रॉस का जन्म कुदरत की करीब दस हजार साल की मेहनत का नतीजा है। करीब 11 से 24 हजार साल पहले विस्कॉन्सिन मैक्कॉनेल ग्लेशियर बनने के दौरान ही उत्तरी युकोन में ग्लेशियर जम गया था। उस वक्त कारक्रॉस में करीब एक किलोमीटर बर्फ जम गई थी, लेकिन बाद में जब बर्फ पिघलने लगी तो दक्षिणी युकोन में पानी बढ़ने लगा और इसी पानी से यहां बड़ी नहरें बनीं। चूंकि ग्लेशियर पिघल चुका था लिहाजा जब उत्तर-पश्चिम से रेतीली हवाएं चली तो उसने इस ऊंचाई पर दुनिया का असंभव सा रेगिस्तान बना दिया।
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कारक्रॉस डेजर्ट (रेगिस्तान) - फोटो : Social media
हालांकि कुछ लोग ये कहते हैं कि झील सूखने की वजह से ये रेगिस्ताना बना है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। लिपॉस्की का कहना है कि आज भी बैनेट झील के पास तेज रेतीली हवाएं चलती हैं जिसकी वजह से यहां छोटे-छोटे रेत के टीले बन जाते हैं। कहा जा सकता है कि हिम-युग, पानी और हवा ने मिलकर इस बुलंदी पर एक अद्भुत रेगिस्तान को जन्म दिया है।

कारक्रॉस डेजर्ट के वर्गीकरण को लेकर भी कई मत हैं। कोई कहता है इसे शुष्क रेगिस्तान का दर्जा दिया जाए तो कोई कहता है इसे नमी वाला इलाका माना जाए। विज्ञान के हिसाब से शुष्क रेगिस्तान के दर्जे के लिए किसी भी जगह पर साल में 250 मिलीमीटर से कम बारिश होना चाहिए, जबकि अर्धशुष्क रेगिस्तान वो होता है जहां साल में 250-500 मिलीमीटर बारिश होती है। इस लिहाज से कारक्रॉस डेजर्ट को अर्ध-शुष्क डेजर्ट के वर्ग में रखा जा सकता है, क्योंकि आसपास के पहाड़ों की बारिश का असर यहां की रेत पर पड़ता है। एक बात का और खास ख्याल रखने की जरूरत है। रेगिस्तान में किसी तरह का पौधा नहीं उग सकता।
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तमाम विरोधाभासों के बावजूद कारक्रॉस को लेकर एक बात पर सबकी सहमति है कि ये जगह आश्चर्य और भय पैदा करती है। यहां आप जितना आगे बढ़ते जाएंगे खौफ बढ़ता जाएगा। लेकिन खौफ से आगे आपको युकोन भेड़िये और गर्मी के मौसम में बाइकल सेज फूल खूब देखने को मिलेंगे। इसके अलावा अब तक जीवों की कई दुर्लभ नस्लें यहां मिल चुकी हैं। उम्मीद है अभी और कई नई जानकारियां यहां से मिलेंगी। यहां के पर्यावरण की जटिलता को पूरी तरह समझना मुश्किल है लेकिन इतना तय है कि ये जगह है बहुत अद्भुत।
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