कोविड-19 से जुड़े सारे शब्दों का मतलब
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क्या होता है लॉकडाउन?
लॉकडाउन एक प्रशासनिक आदेश होता है। इसको सरकार आपदा के दौरान सरकारी तौर पर लागू कर सकती है। इसमें लोगों से घर में रहने का अनुरोध किया जाता है और जरूरी सेवाओं के अलावा सारी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। इसका मकसद होता है, सब अपने-अपने घरों में सुरक्षित रहें।
महामारी अधिनियम 1897 के तहत लॉकडाउन को लागू किया जाता है। इस अधिनियम का इस्तेमाल किसी विकराल और विकट समस्या के दौरान किया जाता है। जब केंद्र और राज्य सरकार को ये विश्वास हो जाए कि कोई बड़ा संकट या महामारी देश या राज्य में आ चुकी है और सभी नागरिकों की जान को इससे खतरा हो सकता है तब इसको लागू किया जाता है। महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2 राज्य सरकार को कुछ महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान करती है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें बीमारी की रोकथाम के लिए अस्थायी रूप से कोई नियम बना सकती हैं।
वर्तमान समय में भारत में लॉकडाउन में आवश्यक सेवाओं जैसे पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, बस टर्मिनल, बस स्टैंड, सुरक्षा सेवाएं, पोस्टल सेवाएं, पेट्रोल पंप, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, टेलीकॉम एवं इंटरनेट सेवाएं, बैंक, एटीएम, पानी, बिजली, नगर निगम, मीडिया, डिलीवरी, ग्रॉसरी और दूध आदि सेवाओं को लॉकडाउन से छूट दी गई है ताकि अव्यवस्था ना फैले।
इस कानून के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान हैं:
- सार्वजनिक सूचना (टीवी, अखबार, फोन, पर्चे आदि) के जरिए महामारी के प्रसार की रोकथाम के उपाय करना।
- सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह जो महामारी से ग्रस्त है उसे किसी अस्पताल या अस्थाई आवास में रख सकती है।
- सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा और आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा भी मिल सकती है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- महामारी एक्ट में सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। अगर कोई अनहोनी होती है तो सरकारी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।