एल हेलिकॉएड
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'ग्वांतानामो'
मन्टिला याद करते हैं कि साल 2014 में जब वो एल हेलिकॉएड पहुंचे थे तो यहां केवल 50 कैदी ही थे। लेकिन दो साल में इसकी संख्या बढ़ कर 300 हो गई। जैसे-जैसे कैदियों की संख्या बढ़ी जेल के पहरेदारों को उन्हें रखने की उचित व्यवस्था करनी पड़ी। इमारत में मौजूद दफ्तर, सीढ़ियां, टॉयलेट और खाली पड़ी जगह की घेराबंदी की गई ताकि जेल के सेल के रूप में इनका इस्तेमाल किया जा सके। जेल के कैदियों ने इन कमरों के नाम भी दिए थे, जैसे- फिश टैंक, लिटिल टाइगर और लिटिल हॉल। लेकिन इनमें सबसे बुरा कमरा था ग्वांतानामो। एल हेलिकॉएड में जेल के पहरेदार के रूप में काम कर चुके विक्टर कहते हैं, "पहले ये कमरा सबूतों को रखने के काम में लाया जाता था। ये 12 मीटर बाई 12 मीटर का कमरा था, जिसमें 50 कैदियों को रखा जाता था।"
मन्टिला कहते हैं, "ना यहां रोशनी थी, ना टॉयलेट, ना सफाई और ना ही सोने का इंतजाम। कमरे की दीवारें खून और इंसान के मल से सनी हुई थीं।" उन्होंने बीबीसी को बताया कि यहां लाए जाने वाले कैदियों को हफ्तों बिना नहाए रहना पड़ता था। उन्हें प्लास्टिक की बोतलों में पेशाब करना होता था और प्लास्टिक के छोटे बैग में मल त्याग करना पड़ता था। इस छोटे बैग को वो 'लिटिल शिप' कहते थे।