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कुरुक्षेत्र में ही क्यों हुआ महाभारत का भीषण युद्ध, श्रीकृष्ण ने इस कारण किया था इस जगह का चुनाव

Wed, 26 Jun 2019 11:50 AM IST
Ayush Jha फीचर डेस्क, अमर उजाला
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mahabharat
ये तो हम सभी जानते हैं कि गीता का उपदेश श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में ही दिया था और इसी जगह महाभारत का भीषण युद्ध भी हुआ था। ये युद्ध तो समाप्त हो गया लेकिन इससे जुड़े ऐसे कई रहस्य हैं, जिनके बारे में आज भी बहुत कम ही लोगों को पता है। इन्हीं रहस्यों में एक प्रश्न यह भी है कि क्यों महाभारत का युद्ध आखिर कुरुक्षेत्र में हुआ था?

 
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Mahabharat - फोटो : Social media
महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था, जिसमें दोनों तरफ से करोड़ों योद्धा मारे गए थे। ये संसार का सबसे भीषण युद्ध था। उससे पहले न तो कभी ऐसा युद्ध हुआ था और न ही भविष्य में कभी ऐसा युद्ध होने की संभावना है। कुरुक्षेत्र की धरती को महाभारत के युद्ध के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ही चुना था, लेकिन उन्होंने कुरुक्षेत्र को ही महाभारत युद्ध के लिए क्यों चुना, इसके पीछे एक गहरा रहस्य छुपा है। शास्त्रों के मुताबिक, महाभारत का युद्ध जब तय हो गया तो उसके लिये जमीन तलाश की जाने लगी। भगवान श्रीकृष्ण इस युद्ध के जरिए धरती पर बढ़ते पाप को मिटाना चाहते थे और धर्म की स्थापना करना चाहते थे। 
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Mahabharat - फोटो : Social media
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को ये डर था कि भाई-भाइयों के, गुरु-शिष्यों के और सगे-संबंधियों के इस युद्ध में एक दूसरे को मरते देखकर कहीं कौरव और पांडव संधि न कर लें। इसलिए उन्होंने युद्ध के लिए ऐसी भूमि चुनने का फैसला किया, जहां क्रोध और द्वेष पर्याप्त मात्रा में हों। इसके लिए श्रीकृष्ण ने अपने दूतों को सभी दिशाओं में भेजा और उन्हें वहां की घटनाओं का जायजा लेने को कहा। 

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महाभारत
सभी दूतों ने सभी दिशाओं में घटनाओं का जायजा लिया और भगवान श्रीकृष्ण को एक-एक कर उसके बारे में बताया। उसमें से एक दूत ने एक घटना के बारे में बताया कि कुरुक्षेत्र में एक बड़े भाई ने अपने छोटे भाई को खेत की मेंड़ टूटने पर बहते हुए वर्षा के पानी को रोकने के लिए कहा, लेकिन उसने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। इस पर बड़ा भाई गुस्से से आग बबूला हो गया और उसने छोटे भाई को छुरे से गोद कर मार डाला और उसकी लाश को घसीटता हुआ उस मेंड़ के पास ले गया और जहां से पानी निकल रहा था वहां उसकी लाश को पानी रोकने के लिए लगा दिया। 
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दूत द्वारा सुनाई इस सच्ची घटना को सुनकर श्रीकृष्ण ने तय किया कि यही भूमि भाई-भाई, गुरु-शिष्य और सगे-संबंधियों के युद्ध के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। श्रीकृष्ण अब बिल्कुल निश्चिंत हो गए कि इस भूमि के संस्कार यहां पर भाइयों के युद्ध में एक दूसरे के प्रति प्रेम उत्पन्न नहीं होने देंगे। इसके बाद उन्होंने महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में करवाने का एलान कर दिया। 
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