वेस्ट बैंक
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वेस्ट बैंक में इस छोटी सी जमीन पर 30 लाख लोग रहते हैं जिनमें 86 फीसदी फलस्तीनी और 14 फीसदी (4,27,800) इस्रायली बस्तियों के लोग हैं। वे अपने-अपने समुदाय में रहते हैं और उन्हें एक-दूसरे से कोई मतलब नहीं रहता। अधिकतर इस्रायली बस्तियां 70, 80 और 90 के दशक में बसाई गईं लेकिन बीते 20 सालों में उनकी जनसंख्या दोगुनी हो चुकी है। इस्रायल इन बस्तियों में बिजली-पानी जैसी सुविधाएं देता है और उनको इस्रायली सेना सुरक्षा देती है।
फलस्तीनी क्षेत्र में इस्रायली बस्तियां बिखरी हुई हैं। इनकी इस्रायली सुरक्षाबल रक्षा करते हैं और फलस्तीनियों का इनमें आ पाना नामुमकिन है। इसके कारण फलस्तीनी शहर इनसे कटे रहते हैं जिसके कारण फलस्तीनी क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट कनेक्शन और बुनियादी ढांचे का विकास बेहद कठिन हो जाता है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बीते समय में यह बस्तियां काफी फैल गई हैं। 2004 में गिवात जीव में 10,000 लोग रहते थे लेकिन अब इसमें 17,000 लोग हैं। यह पश्चिम की ओर फैला है इसमें नए घर जुड़े हैं, यहूदी प्रार्थना स्थल और शॉपिंग सेंटर बने हैं। यह इस्रायली बस्तियां कहीं-कहीं बड़ी हैं और कहीं इसमें कुछ हजार लोग हैं। मोडीन इलीट सबसे बड़ी इस्रायली बस्ती है जिसमें 73,080 लोग रहते हैं। बीते 15 सालों में इसकी आबादी तीन गुना हो चुकी है। पीस नाव नामक संगठन ने इस आंकड़े को इकट्ठा किया है जो इन बस्तियों का विरोध करती है।