Global Warming: बढ़ती आधुनिकता और लग्जीरियस लाइफ ने भले ही हमारे जीवन को आसान किया है, लेकिन दूसरी ओर इसके काफी नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं, जिसका सामना प्रकृती से लेकर जीव जंतुओं को भी करना पड़ रहा है। ऐसे में आज के समय में हम सभी ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को अपने आस-पास देख पा रहे हैं। बड़े अफसोस की बात है कि ये प्रभाव नकारात्मक हैं। वैश्विक तापमान के लगातार बढ़ने की वजह से समुद्री बर्फ पिघलने लगे हैं। ऐसे में अब अंटार्कटिका के एम्परर पेंगुइन (Emperor penguin) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। दरअसल जलवायु परिवर्तन के चलते एम्परर पेंगुइन के विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। इस मामले में अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन पक्षियों को अमेरिकी लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (U.S. Endangered Species Act) के तहत अब सुरक्षित रखा जाएगा। इस पक्षी को लेकर यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस भी काफी चिंता में है।
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तेजी से कम हो रही है अंटार्कटिका के पेंग्विन्स की संख्या
- फोटो : istock
एम्परर पेंगुइन पर मंडरा रहे खतरे को लेकर यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस ने कहा है कि एम्परर पेंगुइन को कानून के तहत संरक्षित कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि ये कॉलोनी में रहते हैं। ये पक्षी अपने बच्चों को अंटार्कटिका की बर्फ पर पालते हैं, जो जलवायु परिवर्तन की वजह से बेहद खतरे में है।
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तेजी से कम हो रही है अंटार्कटिका के पेंग्विन्स की संख्या
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वाइल्ड लाइफ एजेंसी ने कहा कि पिछले 40 सालों के सैटेलाइट डेटा और बाकी सबूतों की जांच से सामने आया है कि पेंगुइन पर फिल्हाल तो विलुप्त होने का खतरा नहीं हैं, लेकिन यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो ये दिन भी दूर नहीं है। एजेंसी ने पर्यावरण समूह, सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी द्वारा 2011 में लगाई गई एक याचिका की मदद लेकर एंडेंजर्ड स्पीशीज एक्ट के तहत इस पक्षी को रखा है।
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तेजी से कम हो रही है अंटार्कटिका के पेंग्विन्स की संख्या
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सरकार की मानें तो जलवायु परिवर्तन इन पक्षियों के असफल प्रजनन का बहुत बड़ा कारण बन रहा है। वेडेल सागर (Weddell Sea) में हैली बे कॉलोनी दुनिया में एम्परर पेंगुइन की दूसरी सबसे बड़ी कॉलोनी है। इस कॉलोनी ने कई सालों तक समुद्री बर्फ की खराब स्थिति का सामना किया है। ऐसे में 2016 में सभी नवजात चूजे डूब गए थे, जिससे इनकी कॉलोनी को बहुत नुकसान हुआ।
तेजी से कम हो रही है अंटार्कटिका के पेंग्विन्स की संख्या
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इस पर सरकार ने चेतावनी दी कि एम्परर पेंगुइन को 'अर्जेंट क्लाइमेट एक्शन' की सख्त जरूरत है। सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी के जलवायु विज्ञान निदेशक शाय वुल्फ ने कहा कि पेंगुइन का अस्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।