मोटे और वजनदार लोग जमाने में कई तरह के पूर्वाग्रहों के शिकार होते हैं। उन्हें नौकरी मुश्किल से मिलती है। वो आलसी और कमजोर इरादों वाले माने जाते हैं। कुछ मामलों में दुकानदार या सेवाएं मुहैया कराने वाले लोग मोटे लोगों से कतराते हैं। कई लोग तो उन्हें देखकर मुस्कुराते तक नहीं।
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fat man
- फोटो : getty images
हाल ही में हमने खुफिया तौर पर खरीदारी के तजुर्बे किए। इनसे मोटे लोगों के प्रति सेल्समैन के पूर्वाग्रह खुलकर सामने आए। हमने यहां तक पाया कि मोटे लोगों को दिखाया जाने वाले सामान भी आम लोगों को दिखाए जाने वाले सामान से अलग था।
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Fat person
इस खुफिया रिसर्च का नतीजा से ये सामने आया कि मोटे लोगों को गोलाकार सामान खरीदने को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाता है। रिसर्च के तहत एक सामान्य कद-काठी के अभिनेत्री घड़ियां और इत्र खरीदने के लिए दुकानों पर गई। उनके साथ दो लोग गुपचुप तौर पर गए। इनका काम ये देखना था कि सेल्समैन उस सामान्य दिखने वाले ग्राहक से कैसा बर्ताव करते हैं, किस तरह के उत्पाद दिखाते हैं।
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Perfume
- फोटो : Pixabay
बाद में वही अभिनेत्री, मोटी महिला का भेष धर कर उसी लिबास में फिर से दुकानों में खरीदारी के लिए गई। इस बार भी उसने उसी रंग के कपड़े पहने थे। बस, वो मोटापे के लिहाज से ज्यादा ढीले-ढाले थे। इस बार भी अभिनेत्री के साथ दो रिसर्चर चुप-चाप चल रहे थे। मोटी महिला के तौर पर वो अभिनेत्री 37 दुकानदारों से मिली। उसने 3 घड़ियां और इत्र या परफ्यूम उन दुकानदारों की सलाह पर खरीदे।
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Watch
- फोटो : Pexels
इस रिसर्च के नतीजों का विश्लेषण करने पर पता चला कि जब अभिनेत्री मोटी महिला बनकर दुकानों में गई थी, तो उसे गोलाकार घड़ियां या गोलाकार इत्र की बोतलें ज्यादा दिखाई गईं और उन्हें बेचने की कोशिश की गई। ये रिसर्च अमरीका की विलानोवा यूनिवर्सिटी की बेथ वैलेन ने की थी। बेथ कहती हैं, 'रिसर्च से हमारी ये सोच सही साबित होती है कि मोटे लोगों के लिए गोलाकार चीजें ही ठीक रहेंगी। ये एक पूर्वाग्रह है।'
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Research
इस रिसर्च को ऑनलाइन भी किया गया। सेल्समेन से बात करके उनसे पूछा गया कि मोटे दिखने वाले लोगों के लिए किस तरह के सामान ठीक रहेंगे। ऑनलाइन सवाल-जवाब में भी मोटे लोगों को गोल चीजें देने की ही बात की गई। इस बार ऑनलाइन सर्वे में दुकानदारों को मोटे ग्राहकों की तस्वीर दिखाई गई थी। फिर उन्हें बेचे जाने वाले सामान की तस्वीरें दिखाने को कहा गया था।
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fat and thin
बेथ वैलेन कहती हैं, 'हम ये दिखाना चाहते थे कि सिर्फ खरीदारी में ही नहीं, सामान्य जीवन में भी मोटे लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है।' ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान भी मोटे दिखने वाले लोगों को गोल आईने, लैम्प, मोमबत्तियां और घड़ियां ही ज्यादा दिखाई गईं। कोणाकार चीजें उन्हें कम ही बेचने की कोशिश की गई, भले ही ग्राहक पुरुष हो या महिला।
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Fat person
भेदभाव वाली ये सोच केवल किसी खास तरह के शरीर को खास उत्पाद से जोड़कर देखने की नहीं है। ये सोच रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। उत्पादों के आकार को इंसान के आकार से जोड़कर देखने की सोच समाज की जहन में गहराई तक बैठी हुई है। एक सोच ये भी है कि मोटे लोगों का स्वभाव ज्यादा दोस्ताना होता है और गोलाकार चीजें भी दोस्ताना मानी जाती हैं।
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fat kid
- फोटो : social media
रिसर्च करने वालों ने ये भी देखने की कोशिश की कि क्या मोटे लोगों को गोलाकार चीजें तब ज्यादा दी गईं, जब उनका व्यवहार ज्यादा दोस्ताना था? इस सवाल का जवाब उन्हें हां में मिला। मोटी महिला का भेष ले कर गई अभिनेत्री जब मुस्कुराते हुए बात कर रही थी, तब उसे ज्यादा गोलाकार चीजें ऑफर की गईं। उसके चेहरे पर सख्ती देखकर दुकानदार का रुख भी अलग लगा।
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Fat person
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ये पूर्वाग्रह शायद सामान्य लोगों के प्रति भी होता है। बेथ वैलेन कहती हैं, 'हमें इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि मोटे लोग गोलाकार सामान ज्यादा पसंद करते हैं या फिर सामान्य इंसान इकहरे दिखने वाले उत्पादों को तरजीह देते हैं।' रिसर्च का नतीजा ये है कि पूर्वाग्रह के चलते मोटे लोगों को शॉपिंग के वक्त गोलाकार उत्पाद ज्यादा बेचे जाएंगे। भले ही वो उन्हें पसंद करते हों या नहीं।
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Racial Discrimination
बेथ वैलेन का मानना है कि ऐसे ही पूर्वाग्रह ज्यादा वजन वाले लोगों के अलावा दूसरे लोगों के प्रति भी हो सकते हैं। बेथ के मुताबिक, 'आप नस्लवादी भेदभाव, बच्चों जैसी शक्ल वाले लोगों और लिंगभेद से जुड़े पूर्वाग्रहों को भी इस खरीद-फरोख्त वाले पूर्वाग्रह से जोड़ कर देख सकते हैं।'
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- फोटो : social media
बेथ कहती हैं कि सेल्स से जुड़े लोगों को ज्यादा अच्छी ट्रेनिंग देनी होगी, उन्हें खरीदारों की पसंद ना-पसंद का ज्यादा ख्याल रखने की सीख दी जानी चाहिए। कोई सामान दिखाने से पहले सामने वाले से पूछा जाना चाहिए कि आखिर उसे कैसी चीजें पसंद हैं।
हालांकि मोटापे और वजन को लेकर, इस पूर्वाग्रह से कोई बड़ा नुकसान तो नहीं है। वो कहती हैं, 'लैम्प गोलाकार हो या कोणीय, कोई भी लैम्प आपके घर में होने से बहुत फर्क नहीं पड़ने वाला है।' लेकिन, ये रिसर्च इस बात की मिसाल है, कि कैसे रोजमर्रा के तजुर्बे हमारी सोच पर असर डालते हैं।