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आ गया ऐसा रोबोटिक 'सुपर सूट', आपके शरीर को देगा गजब की चमत्कारी शक्तियां

Tue, 24 Jul 2018 01:37 PM IST
बीबीसी हिंदी
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Super suit
फिटनेस को लेकर सतर्क रहने वाले लोगों के बीच स्मार्ट वॉच इन दिनों ट्रेंड में है। रोजाना वो कितने कदम चले और उन्होंने उससे कितनी कैलोरी उर्जा खर्च की, इसके लिए वो स्मार्ट वॉच पर नजर रखते हैं। ये भी सच है कि शरीर पर पहने जाने वाले इस तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लोगों की सुविधा बढ़ी है। बल्कि कुछ लोग तो मानते हैं कि कई सामाजिक परेशानियों को हल करने में भी ये उपकरण मददगार हो सकते हैं।
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man walk in ice
एक अनुमान के मुताबिक, साल 2050 तक 60 से ज्यादा उम्र वाले लोगों की संख्या दो गुनी से भी ज्यादा हो जायेगी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उम्रदराज लोगों की संख्या इतनी बढ़ना, 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव माना जायेगा, लेकिन इस स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती होगी लोगों के चलने-फिरने में आने वाली दिक्कतें। उम्र के साथ चलने-फिरने की तकलीफें होना आम बात है। हालांकि इससे किसी भी शख्स के जीवन की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। यह दफ्तरों, सार्वजनिक जगहों और घरों में भी परेशानी का सबब बन सकता है। इसलिए वैज्ञानिक इस दिशा में काम कर रहे हैं।

हल्का होगा सूट
शरीर पर पहने जाने वाली एक ऐसी नई तकनीक पर काम चल रहा है जो इसमें मददगार साबित हो सकती है। एसआरआई इंटरनेशनल (सिस्मिक) नाम के रिसर्च सेंटर ने एक ऐसा रोबोटिक 'सुपर सूट' तैयार किया है जो हल्का होगा और आरामदायक भी। इसे पहनने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी और चलना-फिरना सुगम हो सकेगा। इस सूट की 'इलेक्ट्रिक मांसपेशियों' को छोटी मोटर से ऊर्जा मिलती है। ये इस तरह बांधी गई होती हैं कि देखने में ये बिल्कुल इंसानी मांसपेशियों जैसी लगती हैं।
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Super suit
ये इलेक्ट्रिक मांसपेशियां शरीर के जोड़ों के आसपास कपड़े के भीतर होती हैं और कपड़े की पकड़ से जुड़ी होती हैं। ये पकड़ इंसानी शरीर के 'टेंडन्स' की तरह काम करती है। इस सूट में शरीर की हरकतों पर नजर रखने के लिए एक छोटा कंप्यूटर और सेंसर भी लगे होते हैं। कपड़े के अंदर की मांसपेशियों को सॉफ्टवेयर बता देता है कि एक्टिवेट कब होना है। मोटर, बैटरी, कंट्रोल बोर्ड जैसे तकनीक के पुर्जे एक लो-प्रोफाइल पॉड में लगे होते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा आराम मिले।

चलने फिरने की आजादी
इस रिसर्च सेंटर के संस्थापक और सीईओ रिच मेहाने का कहना है, "अब तक जिस तरह के उत्पाद लोगों की मदद कर रहे थे वो हैं वॉकर और छड़ियां। फिलहाल दूसरा विकल्प ये है कि या तो हम अपनी शारीरिक गतिविधियां सीमित कर लें और घर पर बैठें। ऐसा देखा गया है कि काफी सारे लोग दूसरा विकल्प ही चुनते हैं क्योंकि वे वॉकर या किसी अन्य उपकरण की मदद लेने से हिचकिचाते हैं।"

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इस सूट को आकर्षक और सक्षम बनाने के लिए सिस्मिक रिसर्च सेंटर ने डिजाइनर बेहर के साथ इस पर काम किया है। बेहर का कहना है, "हमारा लक्ष्य ऐसा उत्पाद बनाना है जो आप सचमुच पहनना चाहें। ना कि ऐसा जो आपको मजबूरन पहनना पड़े। आराम के साथ-साथ इसका सुंदर और आकर्षक होना भी उतना ही जरूरी है।"

सिस्मिक का लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक अमरीका, जापान, ब्रिटेन समेत विश्व भर के तमाम बाजारों में इस सूट को लॉन्च किया जाये। पावर्ड क्लोदिंग' में ये उनका पहला उत्पाद होगा। लंदन के 'विक्टोरिया एंड एल्बर्ट' म्यूजियम में होने वाली प्रदर्शनी 'द फ्यूचर स्टार्ट्स हियर' में इस 'सुपर सूट' के साथ ऐसे 100 और उत्पाद रखे जाएंगे।

 
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उम्र बढ़ने के साथ-साथ मांसपेशियों की शक्ति घटती जाती है। इसका सामना हर किसी को करना पड़ता है। जैसे ही आप 60 साल के होते हैं, मांसपेशियों की मजबूती कम होती जाती है। पहनी जा सकने वाली तकनीक न केवल बुजुर्गों के लिए बल्कि अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। ऐसे उत्पाद बनाने पर शोध चल रहा है जो स्ट्रोक के पीड़ितों और मांसपेशियों की समस्या से ग्रस्त बच्चों के लिए उपयोगी साबित हो सकें।

उदाहरण के लिए वेयर हाउस या कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वालों की सुरक्षा के लिए ऐसे उत्पाद बेहद जरूरी हैं। बेहर का कहना है, 'बतौर डिजाइनर, मेरा ध्यान इस बात पर है कि ये तकनीक इस तरह इस्तेमाल हो जो हम इंसानों के लिए उपयोगी हो। और जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर और आसान बना सके।"

 
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old ladies walk in
उनका मानना है कि पहने जा सकने वाली तकनीक अभी शुरुआती दौर में है। हालांकि ये जानना मुश्किल है कि आने वाले दशक में ये पहने जा सकने वाली तकनीक किस दिशा में जाएगी। लेकिन जहां तक आगे बढ़ने का सवाल है तो इस्तेमाल के मामले में ये हमेशा बढ़ते रहने वाला उद्योग है।

विश्वस्तरीय समस्याओं को सुलझाने का एक जरिया भी है। एक बात जो पक्की है वो ये है कि इसमें तकनीक और इंसान के साझा रिश्ता को फायदा पहुंचाने की क्षमता है।
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