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Gate Of Hell: इस मंदिर को माना जाता है "नर्क का द्वार", जो भी अंदर गया वापस नहीं लौटा

Thu, 27 Jan 2022 05:48 PM IST
राजेश मिश्रा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नर्क का द्वार- प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आज भी दुनिया भर से ऐसी जगहों के बारे में सुनने और पढ़ने को मिलता है, जिसे सुनकर काफी हैरानी होती है। इन जगहों पर ऐसे अजीबोगरीब दावे किए जाते हैं जिनपर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक दावा इनदिनों किया जा रहा है कि तुर्की के प्राचीन शहर हिरापोलिस में एक ऐसा मंदिर है जहां जाते ही व्यक्ति की मौत हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति इस मंदिर के अंदर चला जाता है तो उसका शरीर नहीं मिलता है। जी हां! इस मंदिर को "नर्क का द्वार" भी कहा जाता है। ऐसे में बहुत कम ही लोग इस मंदिर के अंदर जाने की हिम्मत जुटा पाते हैं, लेकिन वो दोबारा कभी लौट के नहीं आए। ये जानकर काफी हैरानी होती है कि धार्मिक स्थलों पर व्यक्ति को जीने की राह मिलती है, लेकिन इस मंदिर में व्यक्ति को मौत मिलती है। आइए इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में और भी बातें जानते हैं......         
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नर्क का द्वार- प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कई सालों से यहां रहस्यमयी मौतें हो रही हैं जिसके कारण इस जगह को "नर्क का द्वार" भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रीको-रोमन काल के दौरान, मंदिर में आने वाले व्यक्ति का सिर कलम कर दिया जाता था। मंदिर में सिर कलम करने का क्या कारण था आजतक इसका पता नहीं लग पाया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ग्रीक देवता की जहरीली सांस से इस जगह के संपर्क में आने वाले किसी भी जानवर या इंसान की मौत हो जाती है। 
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नर्क का द्वार- प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मगर, अब इस रहस्य से पर्दा उठ चुका है। मंदिर में और इसके आस-पास होने वाली मौतों के कारण का खुलासा वैज्ञानिकों ने कर दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मंदिर के नीचे से लगातार जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। यही कारण है कि मनुष्य, पशु और पक्षी इसके संपर्क में आते ही मर जाते हैं। वैज्ञानिकों को मंदिर के नीचे की गुफा में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस मिली है।
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नर्क का द्वार- प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक व्यक्ति कॉर्बन डाइऑक्साइड की 10 प्रतिशत की मात्रा से 30 मिनट के अंदर मर सकता है। वहीं मंदिर की गुफा के अंदर कॉर्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 91 प्रतिशत है। यही कारण है कि यहां पर आने वाले हर जीव की मौत हो जाती है और इसीलिए इसे "नर्क का द्वार" कहा जाता है।   
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