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डरावनी झील, इसे छूते ही पत्थर बन जाते हैं लोग, तस्वीरें डरा देंगी

Mon, 20 Jun 2016 12:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com

राजा मिडास की कहानी आपको याद है कि वह जिस चीज़ को भी छूता था वो सोने की बन जाती थी।  लेकिन आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं ऐसी झील जिसके पानी को छूते सब कुछ बन जाता है पत्थर।
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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com
उत्तरी तंजानिया में नेट्रान नामक झील दुनिया में अपने अनोखे पानी के लिए जानी जाती है। फोटोग्राफर निक ब्रांड्ट ने इस बात का खुलासा अपनी किताब 'Across the Ravaged Land' में किया। ब्रांड्ट ने बताया कि जब वह इस झील के किनारे पंहुचे तो वहां दृश्य ने उन्हें चौंका दिया। झील के किनारे जगह-जगह पशु-पक्षियों के स्टैच्यू नजर आए। वे स्टैच्यू असली मृत पक्षियों के थे।
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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com
कोई नहीं जानता है कि ये पशु-पक्षी कैसे मरे। लेकिन वहीं लेक के अत्यधिक रिफ्लेक्टिव नेचर ने उन्हें भ्रमित किया जिसके कारण वे सब पानी में गिर गए। दरअसल झील के पानी में जाने वाले जानवर और पशु-पक्षी कुछ ही देर में कैल्सिफाइड होकर पत्थर बन जाते हैं।

 

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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com

पानी में नमक और सोडा की मात्रा बहुत ही ज्यादा है, इतनी ज्यादा कि इसने मेरी कोडक फिल्म बॉक्स की स्याही को कुछ ही सेकंड में जमा दिया। पानी में सोडा और नमक की ज्यादा मात्रा इन पक्षियों के मृत शरीर को सुरक्षित रखती है।
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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com

सारे  प्राणी calcification के कारण चट्टान की तरह मजबूत हो चुके थे इसलिए बेहतर फोटो लेने के लिए हम उनमे किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकते थे इसलिए फोटो लेने  के लिए हमने उन्हें वैसी ही अवस्था में पेड़ों और चट्टानों पर रख दिया। इन पक्षियों के फोटो का कलेक्शन ब्रांड्ट ने अपनी नई किताब 'Across the Ravaged Land' में पेश किया है। यह किताब उस फोटोग्राफी डाक्यूमेंट का तीसरा वॉल्यूम है, जिसे निक ने पूर्वी अफ्रीका में जानवरों के गायब होने पर लिखा है।
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नेट्रान लेक - फोटो : nationalgeographic.com
पानी में अल्कलाइन का स्तर पीएच 9 से पीएच 10.5 है, यानी अमोनिया जितना अल्कलाइन। लेक का तापमान भी 60 डिग्री तक पहुंच जाता है। पानी में वह तत्व भी पाया गया जो ज्वालामुखी की राख में होता है। इस तत्व का प्रयोग मिस्रवासी ममियों को सुरक्षित करने के लिए रखते थे।
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