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दुनिया की सबसे बड़ी बारूदी सुरंगों वाले इलाके की कहानी

Tue, 29 Dec 2020 03:14 PM IST
योगेश जोशी फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

करीब दो लाख 70 हजार वर्ग किलोमीटर इस रेतीले और बेहद कम आबादी वाले इलाके में बीते पचास सालों से संघर्ष चल रहा है। अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित वेस्टर्न सहारा कभी स्पेन का उपनिवेश था जिसे 1975 में मोरक्को ने छीन लिया था। साल 1991 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए समझौते से मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच चल रही लड़ाई थम गई थी। पश्चिमी अफ्रीका के संघर्ष को भुलाया जा चुका था लेकिन साल 2020 की दो घटनाओं ने इस पर फिर से रोशनी डाली है। इसी साल मोरक्को ने सीमा पर स्थित एक असैन्य पोस्ट की तरफ कदम बढ़ाए तो फिर से युद्ध जैसे हालात हो गए।

इसी साल दिसंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेस्टर्न सहारा पर मोरक्को के अधिकार को मान्यता दे दी। आइए समझते हैं कि ये संघर्ष है क्या और ये कितना महत्वपूर्ण इलाका है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
  • बेहद मुश्किल हालात वाला इलाका जिसमें अकूत प्राकृतिक संसाधन हैं...

ये इलाका सहारा रेगिस्तान के पश्चिमी छोर पर है और अटलांटिक महासागर के तट पर एक हजार किलोमीटर तक फैला है। इसके उत्तर में मोरक्को है, पूर्व में अल्जीरिया है जबकि दक्षिण और दक्षिण पूर्व में मॉरिटानिया है।करीब दो लाख सत्तर हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस दुर्गम इलाके में सिर्फ दस लाख के आसपास लोग रहते हैं। यहां फॅास्फेट का बहुत बड़ा भंडार है। मछली पकड़ने के समृद्ध इलाके भी यहां हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
  • जमीन पर दावे और स्वतंत्रता

मूलरूप से बेर्बेर जनजाति समुदाय का इलाका रहे पश्चिमी सहारा पर 1884 में स्पेन का नियंत्रण हो गया था। 50 साल बाद 1934 में इसे स्पेन के एक प्रांत का दर्जा दे दिया गया था। तब इसे स्पैनिश सहारा कहा गया था।1965 में संयुक्त राष्ट्र ने स्पेन से यहां अपना उपनिवेश समाप्त करने की अपील की थी। मोरक्को की राजशाही ने साल 1959 में स्वतंत्रता हासिल कर ली थी। तब पश्चिमी सहारा पर उसका दावा मजबूत हो रहा था। मोरक्को और मॉरिटानिया सदियों से पश्चिमी सहारा पर अपना-अपना दावा पेश करता रहा था। लेकिन उसी दौरान पश्चिमी सहारा में स्वतंत्रता के लिए भी आंदोलन शुरू हो गया था। 1973 में पोलिसारियो फ्रंट का गठन हुआ।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

साल 1974 में स्पेन ने सहारा के लोगों को अधिक स्वतंत्रता देने और अगले साल आजादी को लेकर जनमत संग्रह कराने का एलान कर दिया। लेकिन 1975 में स्पेन बिना जनमत संग्रह कराए इस इलाके को छोड़कर चला गया। उसी दौरान मोरक्को ने इस पर कब्जा कर लिया।

मोरक्को ने अपने देश के लोगों को यहां बसाने पर भी जोर दिया। नवंबर 1975 में मोरक्को से साढ़े तीन लाख से अधिक लोग सीमा पार कर पश्चिमी सहारा में चले आए। तब से ही पोलिसारियो फ्रंट ने मोरक्को के खिलाफ गुर्रिला युद्ध छेड़ दिया जो अगले 16 साल तक चला।फ्रंट ने अल्जीरिया की मदद से सहरावी अरब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (एसएडीआर) घोषित कर दिया। बाद में 1979 में मॉरिटानिया ने पश्चिमी सहारा पर अपना दावा छोड़ दिया।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

सालों तक चला संघर्ष

मोरक्को के खिलाफ पोलिसारियो फ्रंट को शुरुआती सालों में कामयाबियां मिली लेकिन बाद में उसे भीतरी इलाकोंं की तरफ भागना पड़ा। 1980 के दशक में मोरक्को ने अपने नियंत्रण वाले इलाकों में रेत और पत्थरों की दीवारें खड़ी करीं ताकि गुर्रिला लड़ाकों को दूर रखा जा सके।

सबसे बाहरी दीवार 2700 किलोमीटर लंबी है जिसके दायरे में पश्चिमी सहारा का 80 फीसदी इलाका आता है जो अब मोरक्को के नियंत्रण में है। इस पर कंटीली तारें लगी हैं और बारूदी सुरंगे बिछी हैं।ये दुनिया के सबसे बड़ी बारूदी सुरंग क्षेत्रों में से एक है। अब एसएडीआर के पास सिर्फ बीस फीसदी इलाका ही है।ये भी रेतीला और खाली रेगिस्तान ही है। साल 1991 में समझौता होने तक लड़ाई चली। समझौते के तहत जनमत संग्रह होना था, जो कभी हो ना सका। बीते साल नवंबर में मोरक्को की सेना एक सीमा चौकी को पार कर गई और फिर से युद्ध जैसे हालात हो गए।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

पोलिसारियो फ्रंट ने इसे मोरक्को की तरफ से समझौते का उल्लंघन मानते हुए फिर से समूचे क्षेत्र में युद्ध का एलान कर दिया। तब से फ्रंट ने मोरक्को की सेना पर हमला करने और सैनिकों को हताहत करने के दावे किए हैं। मोरक्को ने इससे इनकार किया है।

पोलिसारियो फ्रंट और मोरक्को दोनों ने ही विवादित क्षेत्र में बाहरी दुनिया के लोगों के जाने पर रोक लगा रखी है, ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि संभव नहीं है। इस विवाद ने मोरक्को और अल्जीरिया के बीच भी तनाव पैदा कर दिया है। अल्जीरिया और मोरक्को के बीच सीमा 1994 से ही बंद है।

अल्जीरिया के रेगिस्तानी शहर टिंडोफ के इर्द-गिर्द सहरावी शरणार्थी बेहद मुश्किल हालातों में रहते हैं। अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या एक से दो लाख के बीच है।

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  • जनमत संग्रह जो कभी नहीं हुआ

संयुक्त राष्ट्र को जनमत संग्रह कराना था जिसके तहत सहारा के लोगों को तय करना था कि वो मोरक्के के साथ रहेंगे या स्वतंत्र राष्ट्र बनाएंगे। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक मिशन भी स्थापित किया था, लेकिन ये जनमत संग्रह अभी तक नहीं हो सका है।संयुक्त राष्ट्र ने बिना कामयाबी के कई बार मामला सुलझाने के प्रयास किए हैं। साल 1991 में समझौता होने के बाद से ये विवाद वहीं है जहां था, हालांकि कई बार नाकाम वार्ताएं जरूर हुई हैं।

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अभी वेस्टर्न सहारा का दर्जा क्या है?

अस्सी से अधिक देशों ने एसएडीआर को मान्यता दी है। इसमें लातिन अमेरिका के कई देश भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र इसे गैर स्वायत्त क्षेत्र मानता है, लेकिन इसके जनमत संग्रह के अधिकार को मान्यता देता है। हालांकि इसी साल दिसंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मोरक्को का क्षेत्र माना था।अमेरिका का कहना है कि मोरक्को के अधिकार को मान्यता देना इसराइल और मोरक्को के बीच हुए समझौते का हिस्सा था। हालांकि बीबीसी की उत्तरी अफ्रीका संवाददाता राना जावेद के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति के मोरक्को के अधिकार को मान्यता देने से जमीनी हालात पर बहुत असर नहीं होगा।

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ट्रंप के फैसले का एसएडीआर और पोलिसारियो फ्रंट ने विरोध किया था। फ्रांस ने भी पश्चिमी सहारा पर मोरक्को के अधिकार को मान्यता दी है। यानी अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो ऐसे देश मोरक्को के साथ हैं जो वीटो का अधिकार रखते हैं।

हालांकि संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष एंतोनियो गुटेरेस को अभी भी लगता है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से इस विवाद का हल निकाला जा सकता है।

वहीं राना जावेद का मानना है कि अब एक स्वतंत्र वेस्टर्न सहारा की संभावना बहुत कम दिखती है और हाल के महीनों में जो तनाव बढ़ा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आगे हालात और भी खराब हो सकते हैं।

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