कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?
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क्या होता है सूर्य ग्रहण
जब सूर्य और धरती के बीच चंद्रमा आ जाता है, तो चांद के पीछे सूर्य का बिंब कुछ समय के लिए पूरी तरह से ढक जाता है। इस प्रक्रिया को ही सूर्य ग्रहण लगना कहा जाता है। इस दौरान जिस जगह पर परछाई पड़ रही होगी वहां आसमान में सूर्य आधा या पूरा ढका दिखेगा। दो अक्तूबर को वलयाकार सूर्य ग्रहण लेगा। यह एक ऐसा सूर्य ग्रहण है, जिसमें धरती से चांद दूर होता है। इसलिए यह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, जिससे आसमान में आग की रिंग नजर आती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आते हैं, तो सूर्य ग्रहण लगता है।