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Lord Krishna: ऐसे हुई थी श्रीकृष्ण की मृत्यु, महाभारत काल से जुड़े इस रहस्य को जान विश्वास नहीं करेंगे आप

Tue, 13 Jun 2023 11:55 AM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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krishna - फोटो : istock
Lord Krishna Death Mystery: भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण की लीला तो हम अक्सर बड़े बुजुर्गों द्वारा सुनते आए हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? मृत्यु का कारण क्या था? क्या श्रीकृष्ण ने मृत्यु के बाद अपना शरीर त्याग दिया और उनकी मृत्यु के बाद क्या हुआ? इन सब सवालों के जवाब जानने की जिज्ञासा हर किसी के मन में जरूर होती है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई...

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म 3112 ईसा पूर्व में मथुरा में हुआ था। हालांकि उनका बचपन वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल और द्वारका आदि जगहों पर बीता। बताया जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने द्वारका पर 36 वर्षों तक राज किया, जिसके बाद उन्होंने अपना देह त्याग दिया था। उस समय उनकी आयु 125 वर्ष थी। दरअसल उनकी मृत्यु के पीछे की वजह दो श्राप हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं।
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krishna - फोटो : istock
बताया जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब दुर्योधन और उसके सभी भाइयों का अंत हो गया, तो उनकी माता गांधारी को अत्यधिक क्रोध आया। अपने बेटे के शव पर शोक व्यक्त करते हुए रणभूमि पर गांधारी ने श्रीकृष्ण को 36 वर्षों के बाद मृत्यु का श्राप दे दिया। ये सुनकर पांडव चकित रह गए, लेकिन श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए इस अभिशाप को स्वीकार कर लिया। इसके बाद ठीक 36 वर्षों के बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु एक शिकारी के हाथों हुई।  
 
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krishna - फोटो : istock
भागवत पुराण में बताया गया है कि एक बार श्रीकृष्ण के पुत्र सांब ने शरारत करने की सोची। सांब आपने मित्रों के साथ एक स्त्री का वेश धारण कर ऋषि-मुनियों से मिलने गए। स्त्री के वेश में सांब ने ऋषियों से कहा कि वह गर्भवती हैं। यदुवंश कुमारों की इस शरारत से ऋषियों ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया कि तुम एक ऐसे लोहे के तीर को जन्म दोगी, जो तुम्हारे पूरे कुल का सर्वनाश कर देगा। 
 

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इस श्राप को सुनकर सांब डर गए और उन्होंने तुरंत सारी घटना उग्रसेन को बताई। श्राप से छुटकारा पाने के लिए उग्रसेन ने सांब से कहा कि तीर का चूर्ण बनाकर प्रभास नदी में प्रवाहित कर दो, जिसके बाद सांबा ने वही किया। इसके बाद उग्रसेन ने राज्य में ये आदेश पारित कर दिया कि यादव राज्य में कोई भी किसी प्रकार की नशीली सामग्री का इस्तेमाल, उत्पादन या वितरण नहीं करेगा। 
 
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इस घटना के बाद द्वारका में कई अशुभ संकेत देखने को मिले। जिसमें सुदर्शन चक्र, बलराम के हल और श्रीकृष्ण के शंख, रथ का अदृश्य हो जाना शामिल था। धीरे-धीरे यहां अपराधों और पापों में भी बढ़ोतरी होने लगी और एक दिन सभी नगर वासी मदिरा के नशे में चूर हो गए और आपस में ही लड़ने-मरने लगे। इस तरह सभी आपस में लड़कर मार गए।  
 
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भागवत पुराण में बताया गया है कि एक दिन श्रीकृष्ण पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, तब जरा नाम के एक बहेलिए ने भगवान कृष्ण को हिरण समझ कर उनपर तीर से प्रहार कर दिया, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने अपने देह त्याग दिया और उनकी मृत्यु हो गई। 
 
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दरअसल इस तीर में उसी लोहे के तीर का अंश था, जिसे सांब ने उग्रसेन के कहने पर चूर्ण बनाकर नदी में प्रवाहित कर दिया था। इस प्रकार ऋषि के श्राप के अनुसार ही समस्त यदुवंशियों का नाश हो गया। गांधारी के श्राप के अनुसार श्रीकृष्ण की मृत्यु हो गई।
 
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