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Ajab Gajab: यहां दी जाती थी मगरमच्छों की बलि, हजारों साल पुरानी ममी से वैज्ञानिकों ने खोले अनोखे रहस्य

Thu, 22 Aug 2024 05:20 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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remains - फोटो : istock
Mystery Of 3000 Year Old Mummified Crocodile: हाल ही में वैज्ञानिकों ने प्राचीन मिस्र के मगरमच्छ की ममियों के रहस्यों का खुलासा करने का दावा किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 3 हजार साल पुरानी ममी की मदद से वैज्ञानिकों ने इन रहस्यों से पर्दा उठा है। इस अहम जानकारी को हासिल करने में हजारों साल लग गए कि किस तरह इन जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण से बाहर करके उनकी बलि दी जाती थी। इतना ही नहीं 3 हजार साल पुराने इस मगरमच्छ की ममी ने प्राचीन मिस्र में मगरमच्छ पंथों से जुड़े मिथकों के कई सही जवाब सामने रखे हैं। इसने प्राचीन धार्मिक पंथों के रहस्यों को भी सुलझाने में मदद की है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद और मिस्र के वैज्ञानिक लिडिजा मैकनाइट द्वरा लिखे गए इस रिसर्च में कई खुलासे हुए हैं। प्राचीन मिस्र में मगरमच्छों को सोबेक देवता के अवतार के रूप में पूजा जाता था, जो ये मगरमच्छ नील नदी में रहते थे। 
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remains - फोटो : istock
शोधकर्ताओं ने बताया कि मिस्र में बहुत सारे ममीकृत मगरमच्छ मिले हैं, जिनमें से कुछ की 19.7 फीट तक लंबे हैं। ये मगरमच्छों को लेकर पूजा पाठ जैसी गतिविधि की ओर संकेत करते हैं। यह बताता है कि कभी मगरमच्छों को बलि देकर ममी के रूप में संरक्षित किया जाता था। मैकनाइट और उनके सहयोगियों का कहना है कि प्राचीन मिस्र के लोगों ने अपने धार्मिक अनुष्ठानों के लिए इतने विशाल आकार से मगरमच्छ कैसे प्राप्त किए, यह सवाल आज भी बरकरार है और हैरान करता है।  
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remains - फोटो : istock
कुछ लोगों का अनुमान है कि मेडिनेट मैडी के पुरातात्विक स्थल पर एक पुरानी हैचरी (मछली पालने का जहाज) मिलने के बाद जानवरों को पाला गया होगा और फिर इनकी बलि दी जाती होगी। हालांकि, यह अब भी समझ नहीं आया है कि वयस्क होने के बाद इन विशाल जानवरों को किस तरह रखा गया और देखभाल की गई।

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remains - फोटो : istock
पानी के किनारे हुई वास्तविक घटनाओं का पता लगाने के लिए बर्मिंघम संग्रहालय और आर्ट गैलरी से एक 7.2 फीट लंबे ममीकृत मगरमच्छ को स्कैन किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने जानवर की आंत के अंदर एक कांस्य मछली का हुक पाया, जो दर्शाता है कि ये एक जंगली जानवर था और इसका शिकार ममीकरण के लिए किया गया था।
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remains - फोटो : istock
इसके अलावा वैज्ञानिकों को मगरमच्छ के पाचन तंत्र के अंदर एक छोटी मछली भी मिली, जो दर्शाती है कि जानवर ने मरने से ठीक पहले अपना अंतिम भोजन खाया और इसके तुरंत बाद ही इसे मारकर ममीकृत कर दिया गया। ऐसे में वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष  निकाला है कि मगरमच्छ को प्राचीन मिस्र के सोबेक देवता को भेंट के लिए पकड़ा था।
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