शनि के दक्षिणी ध्रुव के ऊपर वैज्ञानिकों को एक ऐसी विशाल वायुमंडलीय आकृति मिली है, जिसके 10 स्पष्ट किनारे हैं। करीब 13 हजार किलोमीटर चौड़ी यह रहस्यमयी संरचना पृथ्वी से भी थोड़ी बड़ी है। वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि शनि के वातावरण में इतनी नियमित ज्यामितीय आकृति आखिर बनी कैसे। उनका मानना है कि तेज हवाओं, जेट स्ट्रीम और किसी बड़े तूफान से पैदा हुई वायुमंडलीय तरंग ने इसके निर्माण में भूमिका निभाई हो सकती है।
साइंस एडवांसेज में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस अनोखी आकृति पर वैज्ञानिकों की नजर पहली बार 2024 में पड़ी थी। इसके बाद नासा के वैज्ञानिक एमी साइमन और उनके सहयोगियों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप से 2023 से 2025 के बीच ली गई तस्वीरों का अध्ययन किया। स्पेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ द बास्क कंट्री के वैज्ञानिक अगुस्तीन सांचेज-लेगा के अनुसार इन तस्वीरों ने इस आकृति के अस्तित्व की बिल्कुल स्पष्ट पुष्टि कर दी।