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शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर नजर आई 13 हजार किमी चौड़ी रहस्यमयी आकृति, देखकर हैरत में पड़े वैज्ञानिक

Thu, 03 Sep 2026 09:45 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

वैज्ञानिकों को शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर 10 किनारों वाला नया वायुमंडलीय पैटर्न मिला है। यह रहस्यमयी संरचना पृथ्वी से भी थोड़ी बड़ी है, जिसकी चौड़ाई 13 हजार किलोमीटर है। इस नए वायुमंडलीय पैटर्न को देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। 
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शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर दिखी 13 हजार किमी चौड़ी रहस्यमयी आकृति - फोटो : AI
शनि के दक्षिणी ध्रुव के ऊपर वैज्ञानिकों को एक ऐसी विशाल वायुमंडलीय आकृति मिली है, जिसके 10 स्पष्ट किनारे हैं। करीब 13 हजार किलोमीटर चौड़ी यह रहस्यमयी संरचना पृथ्वी से भी थोड़ी बड़ी है। वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि शनि के वातावरण में इतनी नियमित ज्यामितीय आकृति आखिर बनी कैसे। उनका मानना है कि तेज हवाओं, जेट स्ट्रीम और किसी बड़े तूफान से पैदा हुई वायुमंडलीय तरंग ने इसके निर्माण में भूमिका निभाई हो सकती है।

साइंस एडवांसेज में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस अनोखी आकृति पर वैज्ञानिकों की नजर पहली बार 2024 में पड़ी थी। इसके बाद नासा के वैज्ञानिक एमी साइमन और उनके सहयोगियों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप से 2023 से 2025 के बीच ली गई तस्वीरों का अध्ययन किया। स्पेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ द बास्क कंट्री के वैज्ञानिक अगुस्तीन सांचेज-लेगा के अनुसार इन तस्वीरों ने इस आकृति के अस्तित्व की बिल्कुल स्पष्ट पुष्टि कर दी।
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शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर रहस्यमयी आकृति देखकर वैज्ञानिक हैरान - फोटो : NASA
वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी अप्रत्याशित है क्योंकि शनि के चारों ओर लंबे समय से कई तरह की वायुमंडलीय हलचल देखी जाती रही है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर इतनी व्यवस्थित 10-किनारों वाली संरचना पहले नहीं देखी गई थी।


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क्या है शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर दिखी आकृति का रहस्य? - फोटो : NASA
उत्तर में भी है ऐसी रहस्यमयी आकृति

शनि का उत्तरी ध्रुव भी दशकों से वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा है। वहां बादलों और हवाओं से बना एक विशाल षट्भुज यानी छह किनारों वाला पैटर्न मौजूद है। इसकी पहली पहचान 40 साल से भी अधिक पहले हुई थी और यह आज भी कायम है।नई दक्षिणी संरचना उससे मिलती-जुलती जरूर है, लेकिन दोनों में अंतर भी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिणी ध्रुव का दशभुज उत्तरी षट्भुज की तुलना में थोड़ा बड़ा है और शनि के घूर्णन के साथ इसकी गति में भी कुछ ज्यादा बदलाव दिखाई देता है।

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2024 में पहली बार दिखी थी इसकी झलक - फोटो : NASA
तेज हवाओं और तूफान से बनने का अनुमान

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दशभुज के निर्माण के पीछे शनि के दक्षिणी ध्रुव के पास चलने वाली शक्तिशाली जेट स्ट्रीम हो सकती है। तेज हवाओं के बीच वातावरण में बनने वाली बड़ी तरंग ने संभवतः इस पैटर्न को 10 किनारों का आकार दिया। इसके आसपास आए किसी बड़े तूफान का भी इससे संबंध हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इसे निश्चित कारण नहीं मान रहे हैं। नासा की एमी साइमन के मुताबिक यह बेहद जटिल तरल-गतिकी की प्रक्रिया है और यह आकृति शनि के बादलों के नीचे गहराई में चल रही प्रक्रियाओं के बारे में भी संकेत दे सकती है।

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आकृति का आगे खुल सकता है रहस्य - फोटो : NASA
आगे खुल सकता है रहस्य

शनि की कक्षा में कोई अंतरिक्ष यान 2017 के बाद से नहीं रहा है। इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि दशभुज वास्तव में कब बना। यह कितने समय तक कायम रहेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप समेत अन्य दूरबीनों से इसके लगातार अध्ययन की तैयारी है।वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इस बात का एक और प्रमाण है कि शनि एक बेहद गतिशील और लगातार बदलता हुआ ग्रह है। बृहस्पति के ध्रुवों पर चक्रवाती तूफानों की व्यवस्थित संरचना जरूर देखी गई है, लेकिन किसी दूसरे ग्रह पर ऐसी नियमित बहुभुजीय वायुमंडलीय आकृति अब तक नहीं देखी गई थी।
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