दुनिया में बहुत से लोग अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट जिन्हें उड़नतश्तरी या यूएफओ भी कहते हैं, के अस्तित्व में भरोसा रखते हैं। इनके लिए यह दिन सेलीब्रेट किया जाता है। इसलिए जुलाई में लोग छतों पर टेलिस्कोप लगाए आसमान निहारते दिख जाएं तो चौंकिएगा मत।
विश्व यूएफओ दिवस एक जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल 2 जुलाई को 'विश्व यूएफओ दिवस' भी मनाया जाने लगा है। ऐसे में आइए आज जानें कि धरती पर कब-कब यूएफओ देखे गए और वो मामले लोगों के बीच में विशेष रूप से कैसे छाए रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली बार व्यापक रूप से अज्ञात उड़नतश्तरी जैसी चीजें आसमान में मंडराती देखी गई। 2 जुलाई को 'यूएफओ डे मनाए जाने का लक्ष्य निस्संदेह उनके अस्तित्व के बारे में जानने के लिए और सरकारों को यूएफओ के दृश्यों पर अपनी फाइलों को अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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सबसे पहले जर्मनी में देखी गई थी उड़नतश्तरी, 1561
जर्मनी के नूरेमबर्ग में सबसे पहले अप्रैल 1561 में लोगों ने आसमान में बड़े 'ग्लोब्स', विशालकाय 'क्रॉस' और अजीबोगरीब 'प्लेट' जैसी चीजें देखे जाने का दावा किया गया। उस समय के चित्रों और लकड़ी की कटिंग से उस घटना की जानकारी मिलती है।
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1897 में टेक्सस में यूएओ आया नजर
लोगों ने सिगार के आकार की कोई बड़ी चीज देखी जो कथिततौर पर विंडमिल से जा टकराई। टेक्सस हिस्टोरिकल कमिशन को एक संकेत मिला जिसमें इस बात का जिक्र था कि 1897 में यहां एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसके मलबे से एक ऐलियन के शव को भी निकाला गया और किसी अनजान जगह पर उसे दफना दिया गया।
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अमेरिका में 1947 में देखे गए यूएफओ
एक शख्स को रॉसवैल में क्रैश हुए प्लेन जैसी चीज का मलबा मिला। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें साफ लग रहा था कि यह स्पेसक्राफ्ट किसी दूसरी दुनिया से आया है। उन्होंने ऐलियन के शवों को भी देखने का दावा किया। हालांकि एयर फोर्स ने 1994 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि मलबा प्रयोग में लाए जा रहे सर्विलांस बैलूंस का था। जो ऐलियन के शव बताए जा रहे थे, वे वास्तव में डमीज थे। हालांकि कुछ लोग यह भी कहते हैं कि सरकार ऐलियन के धरती पर आने की इस घटना को छिपाना चाहती थी। इसलिए यह कहानी गढ़ दी गई।
उधर अमेरिका में ही 24 जून 1947 को एक प्राइवेट विमान के पायलट ने आसमान में उड़ती हुई किसी अज्ञात चीज को देखे जाने का दावा किया था। उनके साथ यह घटना Mount Rainier के करीब हुई थी। इस घटना की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इस घटना के दो सप्ताह के भीतर-भीतर ही ऐसी ही कई अज्ञात चीजें आसमान में उड़ते हुए देखे जाने के दावे किए गए। इसलिए यह घटना ओर भी बड़ी हो गई। द्वितिय विश्य युद्ध के बाद यूएफओ देखे जाने की इस घटना को आधुनिक युग की शुरुआत होने के साथ जोड़कर देखा जाने लगा।
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1951 में नई दिल्ली में देखा गया यूएफओ
नई दिल्ली में एक फ्लाइिंग क्लब के 25 सदस्यों ने सिगार के आकार की कोई चीज देखी, जो करीब 100 फुट लंबी थी। UFO अचानक कुछ देर बाद आंखों से ओझल हो गया। यह घटना वर्ष 1951 में 15 मार्च सुबह 10.20 बजे की बताई जाती है।
जुलाई 1952 में वॉशिंगटन डी. सी.
अमेरिका के वॉशिंगटन नैशनल एयरपोर्ट और एंड्रयू एयर फोर्स बेस के रेडार पर भी कई अजीबोगरीब चीजों के संकेत मिले। इस साल प्रॉजेक्ट ब्लू बुक लॉन्च किया गया जिससे आसमान में संभावित खतरे के बारे में जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण किया जा सके। हालांकि बाद में इस घटना को तापमान बढ़ने से जोड़ा गया। तर्क दिया गया कि गर्म हवा कभी-कभी ऐसी सीलिंग तैयार कर देती है जिससे रेडार प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में टेलिफोन के खंभे जैसी चीजें हवा में हजारों फुट ऊपर डिटेक्ट होने लगती हैं।
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- फोटो : Alien
2006 में शिकागो की घटना
शिकागो में ओ'हारे इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर गेट C-17 के ऊपर एक विचित्र उड़नतश्तरी जैसी चीज उड़ती दिखाई दी। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वे इस बात से परेशान हैं कि न तो सरकार है और न ही यूनाइटेड एयरलाइंस की ओर से इस घटना का जायजा लिया गया।
जनवरी टेक्सस में साल 2008 में सामने आई घटना
टैक्सस में दर्जनों लोगों ने आसमान में एक बड़ी और चमकीली चीज को उड़ते देखा। लेकिन इसे भी सरकारी सूत्रों ने नकार दिया। पास मौजूद सेना के बेस कैंप ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया।
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कोलकाता
29 अक्टूबर 2008को पूर्वी कोलकाता में तड़के 3.30 से 6.30 बजे के बीच आसमान में तेजी से एक बड़ी चीज जाती दिखी। इसे एक हैंडीकैम से फिल्माया गया। अजीबोगरीब चीज से कई रंग निकलते दिखाई दिए। कई लोगों ने इसे देखा और UFO की एक झलक पाने के लिए E.M. बाइपास पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। बाद में मीडिया में भी इसका एक वीडियो दिखाया गया हालांकि यह वीडियो में साफ-साफ नहीं नजर आ रहा था।
चेन्नै और लद्दाख
20 जून 2013को चेन्नै में कुछ लोगों ने रात में करीब 8.55 बजे दक्षिण से उत्तर की तरफ जाती एक चमकदार चीज देखी। स्थानीय अखबार में भी खबर छपी थी। 4 अगस्त को भारतीय सेना के जवानों ने लद्दाख में अज्ञात चीजें आसमान में देखीं। लेकिन इन घटनाओं को लेकर कुछ भी साफ न पता चल सका। माना गया कि ये एलियन के यूएफओ विमान हो सकते हैं।
यरुशलम
यरुशलम में जनवरी 2011 में'डोम ऑफ रॉक' के ऊपर एक चमकीली चीज दिखाई दी। इस घटना से भी कुछ साफ न था क्योंकि चमक इतनी तेज थी कि विमान की आकृति समझ ही न आ सकी। इसे स्थानिय मीडिया ने यूएफओ बताया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें इस दिवस का उद्देश्य लोगों को जागरूक करके यह बताना है कि वे आसमान में दिखने वाली अनजान चीजों के बारे में जानकारी दें। खासतौर से ऐसी चीजें, जिसे पहले कभी देखा नहीं गया। अमेरिका में अक्सर एलियंस और यूएफओ देखने जैसी खबरें सुर्खियों में छाई रहती हैं।