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Samudrayaan Mission: क्या है भारत का अगला मिशन समुद्रयान, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Tue, 12 Sep 2023 02:00 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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What is the Samudrayaan Mission - फोटो : Twitter@KirenRijiju
Samudrayaan Mission: भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कराकर इतिहास रच दिया है। इसके एक सप्ताह बाद ही भारत ने सूर्य के अध्ययन के लिए मिशन लॉन्च किया है। भारत का यह पहला सूर्य मिशन है। इसके बाद अब भारत समुद्र की गहराई नापेगा और समुद्र के अंदर छिपे रहस्यों को जानने की कोशिश करेगा। भारत जल्द ही अपने समुद्रयान मिशन का ट्रायल शुरू करने जा रहा है। 

मिशन समुद्रयान में तीन लोगों को एक स्वदेशी सबमर्सिबल में बैठाकर 6 किलोमीटर की गहराई तक भेजा जाएगा। ताकि वहां के स्रोतों और जैव-विविधता का अध्ययन किया जा सके। इस समुद्रयान का नाम मत्स्य 6000 है। इसके जरिए समुद्र तल से करीब 6 किलोमीटर नीचे कोबाल्ट, निकल और मैंगनीज जैसी बहुमूल्य धातुओं की खोज की जाएगी। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि अगला मिशन समुद्रयान है। आइए भारत के समुद्रयान मिशन से जुड़ी हर बात जानते हैं। 
 
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What is the Samudrayaan Mission - फोटो : Twitter
मत्स्य 6000 का निर्माण करीब दो साल में किया गया है। अगले साल यानी 2024 की शुरुआत में टेस्टिंग के लिए चेन्नई तट से इसे बंगाल की खाड़ी में छोड़ा जाएगा। समुद्र में 6 किलोमीटर की गहराई तक जाना चुनौतियों से भरा हुआ है। भारतीय वैज्ञानिकों को इसी साल जून में घटी टाइटन दुर्घटना का भी ध्यान है। समुद्र में टाइटैनिक के मलबे तक पर्यटकों को ले जाने वाले इस सबमर्सिबल में धमाका हो गया था। इसको देखते हुए भारतीय वैज्ञानिक मत्स्य 6000 के डिजाइन को बार-बार जांच रहे हैं। 
 
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What is the Samudrayaan Mission - फोटो : Twitter
क्या है समुद्रयान मिशन? 

समुद्रयान पूरी तरह से एक स्वदेशी परियोजना है। मत्स्य 6000 एक सबमर्सिबल है जिसे बनाने के लिए टाइटेनियम एलॉय का इस्तेमाल किया गया है। यह 6000 मीटर की गहराई पर समुद्र तल के दबाव से 600 गुना अधिक यानी 600 बार (दबाव मापने की इकाई) प्रेशर झेल सकती है। सबमर्सिबल का व्यास 2.1 मीटर है। इसके जरिए तीन लोगों को 6000 मीटर की समुद्री गहराई में 12 घंटे के लिए भेजा जाएगा। इसके अंदर 96 घंटे की इमरजेंसी इंड्यूरेंस है। उम्मीद है कि इस मिशन को 2026 में लाॅन्च किया जाएगा। अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और चीन के बाद मानवयुक्त सबमर्सिबल बनाने वाला भारत छठा देश है। 

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What is the Samudrayaan Mission - फोटो : Twitter
जानिए क्या करेगा समुद्रयान? 

समुद्रयान समुद्र की गहराई में खोज करेगा। इसके साथ ही इसका उद्देश्य समुद्र की गहराई में दुर्लभ खनिजों के खनन के लिए पनडुब्बी से इंसानों को भेजना है। इस परियोजना की लागत करीब 4100 करोड़ रुपए हैं। समुद्र की गहराई में गैस हाइड्रेट्स, पॉलिमैटेलिक मैन्गनीज नॉड्यूल, हाइड्रो-थर्मल सल्फाइड और कोबाल्ट क्र्स्ट जैसे संसाधनों की खोज के लिए समुद्रयान को भेजा जाएगा। 1000 से 5500 मीटर तक की गहराई में यह वस्तुएं मिलती हैं।

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What is the Samudrayaan Mission - फोटो : Twitter
डीप ओशन मिशन के बारे में...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जून 2021 में इस मिशन की शुरुआत की थी। इसका मकसद समुद्रीय संसाधनों के बारे में जानना है। समुद्री संसाधनों के इस्तेमाल के लिए गहरे समुद्र में तकनीक भेजना। इसका मकसद भारत सरकार की ब्लू इकोनॉमी में सहायता करना है। समुद्रयान इसी का हिस्सा है। 
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