Rwanda Genocide: दुनिया के इतिहास में ऐसे नरसंहार हुए हैं, जिन्हें शायद कभी भुलाया नहीं जा सकता है। एक ऐसा ही नरसंहार करीब 30 साल पहले हुआ था, जिसके बारे में कहा जाता है कि 100 दिनों तक चले भीषण नरसंहार में एक-दो नहीं बल्कि करीब आठ लाख लोग मारे गए थे। इसे इतिहास का सबसे भीषण नरसंहार कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। इस नरसंहार की शुरुआत की कहानी भी रूह कंपा देने वाली है। तो चलिए जानते हैं आखिर ये नरसंहार कहां हुआ था और क्यों हुआ था, जिसमें लाखों लोग मौत के घाट उतार दिए गए थे।
यह भीषण नरसंहार अफ्रीकी देश रवांडा में हुआ था, जिसकी शुरुआत साल 1994 में रवांडा के राष्ट्रपति जुवेनल हाबयारिमाना और बुरुंडी के राष्ट्रपति सिप्रेन की हत्या से हुई थी। उनके हवाई जहाज को ही उड़ा दिया गया था। इस जहाज को किसने मार गिराया था, यह अब तक साबित नहीं हो सका है, लेकिन कुछ लोग इसके लिए रवांडा के हूतू चरमपंथियों को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि रवांडा पैट्रिएक फ्रंट (आरपीएफ) ने ये काम किया था। चूंकि दोनों ही राष्ट्रपति हूतू समुदाय से संबंध रखते थे, इसलिए हूतू चरमपंथियों ने इस हत्या के लिए रवांडा पैट्रिएक फ्रंट को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, आरपीएफ का आरोप था कि जहाज को हूतू चरमपंथियों ने ही उड़ाया था, ताकि उन्हें नरसंहार का एक बहाना मिल सके।