सरदार पटेल
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इसके लिए सरदार पटेल ने जोधपुर के महाराज को आश्वासन दिया कि भारत में उन्हें वे सभी सुविधाएं दी जाएंगी, जिनकी मांग पाकिस्तान से की गई थी। जिसमें शस्रों का, अकालग्रस्त इलाकों में खाद्यानों की आपूर्ति, जोधपुर रेलवे लाइन का कच्छ तक विस्तार आदि शामिल था। हालांकि, मारवाड़ के कुछ जागीरदार भारत में भी विलय के विरोधी थे। वे मारवाड़ को एक स्वतंत्र राज्य के रुप में देखना चाहते थे, लेकिन महाराजा हनवंत सिंह ने समय को पहचानते हुए भारत-संघ के विलय पत्र पर 1 अगस्त 1949 को हस्ताक्षर कर अपने रियासत को भारत में विलय कर दिया।