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Zara Hatke: भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा, बेहद रोचक है कहानी

Mon, 22 Dec 2025 03:15 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Zara Hatke: शादी न सिर्फ दो इंसानों का मिलन है, बल्कि दो परिवारों, परंपराओं और भावनाओं का संगम है। हिंदू धर्म में विवाह को 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। शादी के बाद लड़की विदा होकर अपने पति के साथ उसके घर चली जाती है और वहीं रहती है। लेकिन भारत में एक ऐसी जगह जहां दुल्हन विदा नहीं विदा होता है, बल्कि दूल्हे की विदाई होती है। 
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भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा - फोटो : Adobe Stock
Zara Hatke: भारत में आपको धर्म, जाति, रंग, विचार जैसे अनेकों स्तर पर आपको विविधिता देखने को मिलेगी। यही विशेषता भारत को दूसरे देशों से अलग बनाती है। भारत में अलग-अलग संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं। उनकी वेशभूषा, खानपान और मान्यताएं एक दूसरे से अलग हैं।

इसी कड़ी में हम आपको एक ऐसी जनजाति के बारे में बताएंगे, जहां पर शादी होने के बाद दुल्हन, दूल्हे के घर नहीं जाती बल्कि दूल्हा, दुल्हन के घर पर आकर रहता है। इस प्रथा का मेघालय की खासी जनजाति में पालन किया जाता है। यह एक मातृसत्तात्मक समाज है। इस जनजाति में वंशीय परंपरा माता के नाम पर चलती  है। 
 
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भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा - फोटो : Adobe Stock
इस समुदाय में माता-पिता की संपत्ति पर पहला अधिकार महिलाओं का होता है। लड़का और लड़की को विवाह हेतु अपना जीवन साथी चुनने की पूरी आजादी दी जाती है। खासी समुदाय में किसी भी प्रकार के दहेज की व्यवस्था नहीं है, जो इस समुदाय की एक खास बात है। महिलाएं अपनी इच्छा पर किसी भी वक्त अपनी शादी को तोड़ सकती हैं। परिवार की सबसे छोटी बेटी पर सबसे अधिक जिम्मेदारी होती है। वही घर की संपत्ति की मालिक होती है। 

 
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भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा - फोटो : Adobe Stock
खासी लोगों की संख्या तकरीबन 9 लाख के करीब है। इनकी ज्यादातर आबादी मेघालय में रहती है। इनकी आबादी का कुछ हिस्सा असम, मणिपुर और पश्चिम बंगाल में रहता है। यह समुदाय झूम खेती करके अपनी आजीविका चलाता है। संगीत के साथ इसका एक गहरा जुड़ाव है। ये विभिन्न तरह के वाद्य यंत्रों जैसे गिटार, बांसूरी, ड्रम आदी को गाते बजाते हैं।  

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भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा - फोटो : Adobe Stock
ये लोग पहले म्यंमार में रहते थे। इसके बाद इस जनजाति ने वहां से अप्रवास किया और भारत के पूर्वी असम में आकर रहने लगे। इसके बाद धीरे-धीरे इनकी आबादी मेघालय में आकर बसने लगी। इस जनजाति की भाषा खासी है।

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भारत में यहां पर शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा होता है विदा - फोटो : Adobe Stock
खासी जनजाती के अलावा मेघालय की अन्य दो जनजातियों (गारो और जयंतिया) में भी यही प्रथा है। इन दोनों जनजातियों में यही व्यवस्थाएं चलती है। यहां पर भी शादी के बाद दूल्हा, अपनी सासू मां के घर पर जाकर रहता है। अमूमन भारत में यह देखा जाता है कि लड़का होने पर ज्यादा खुशी मनाई जाती है। वहीं खासी जनजाति में लड़की होने पर खुशी मनाई जाती है।  
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