कैलाश पर्वत
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रूस के एक पर्वतारोही, सरगे सिस्टियाकोव ने बताया कि, 'जब मैं कैलाश पर्वत के बिल्कुल पास पहुंच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उस पर्वत के बिल्कुल सामने था, जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका, लेकिन अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन में ये ख्याल आने लगा कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए। उसके बाद जैसे-जैसे मैं नीचे आते गया, मेरा मन हल्का होता गया।'