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अजब-गजब: बेहद रहस्यमयी है ये प्राचीन मंदिर, जहां जाते ही भक्त हो जाते हैं मालामाल! जानिए इसकी खासियत

Sat, 13 Nov 2021 04:39 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इस मंदिर में जाते ही भक्त हो जाते हैं मालामाल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
भारत के हर गांव में मंदिर हैं। इन मंदिरों में कई बेहद रहस्यमयी मंदिर हैं। इनकी अपनी अलग-अलग पहचान हैं। ऐसा ही एक रहस्यमयी मंदिर मध्य प्रदेश में स्थित है। रतलाम जिले के माणक में स्थित इस प्राचीन मंदिर का नाम महालक्ष्मी मंदिर है। इस मंदिर में आने वाले हर भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वो मालामाल हो जाता है। आईए जानते हैं अनेक रहस्यों को समेटे इस महालक्ष्मी मंदिर के बारे में...

इस मंदिर में जो भी भक्त आता है उसको सोने-चांदी के सिक्के और गहने दिए जाते हैं और उसे वह अपने घर लेकर जाता है। यहां पर हर दिन सैकड़ों भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में भक्त हर दिन करोड़ों रुपये के गहने मां महालक्ष्मी का चढ़ाते हैं। इसके साथ ही भक्त इस मंदिर में लाखों रुपये दान में देते हैं। इस मंदिर में भक्तों की आस्था बहुत ज्यादा है। 
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इस मंदिर में जाते ही भक्त हो जाते हैं मालामाल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
इस मंदिर में दिवाली के मौके पर धन कुबेर का दरबार लगता है। इस दौरान महालक्ष्मी मंदिर में दीपोत्सव का आयोजन होता है। यह कार्यक्रम धनतेरस से लेकर पांच दिनों तक चलता है। इस दौरान मंदिर को फूलों की जगह गहनों और रुपयों से सजाया जाता है। धन कुबरे के दरबार में भक्तों को सोने-चांदी के गहने और रुपये प्रसाद के रूप में मिलते हैं। 
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इस मंदिर में जाते ही भक्त हो जाते हैं मालामाल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दिवाली के मौके पर महालक्ष्मी मंदिर भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है। कहा जाता है कि धनतेरस को कुबेर की पोटली को खोल दिया जाता है और यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता है। कई सालों से मंदिर में गहने और रुपये चढ़ाने की परंपरा है। 
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इस मंदिर में जाते ही भक्त हो जाते हैं मालामाल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
मान्यताओं के मुताबिक, पहले राजा अपने राज्य की समृद्धि और सुख शांति के लिए इस मंदिर में गहने और धन चढ़ाते थे। तब से माता महालक्ष्मी को रुपये और गहने चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। कहते हैं कि ऐसा करने से भक्तों पर माता की कृपा हमेशा बनी रहेगी। 
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