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भारत के इस रहस्यमय किले में छुपा है गहरा राज, रात में यहां जाना खतरे से खाली नहीं

Mon, 09 Dec 2019 02:26 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कालिंजर का किला - फोटो : Social media
भारत में ऐसे कई रहस्यमय किले मौजूद हैं, जो बाहर से देखने पर तो काफी खूबसूरत लगते हैं, लेकिन वो अपने अंदर कुछ राज समेटे हुए हैं। एक ऐसा ही रहस्यमय किला है बुदेंलखंड प्रांत में, जिसे कालिंजर के किले के नाम से जाना जाता है। 
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बुदेंलखंड में स्थित कालिंजर का किला - फोटो : Social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि बुदेंलखंड प्रांत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में बंटा हुआ है। इस प्रांत के अंदर आने वाले कुछ जिले उत्तर प्रदेश में पड़ते हैं तो कुछ मध्य प्रदेश में पड़ते हैं। वैसे कालिंजर यूपी के बांदा जिले में स्थित है। 
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कालिंजर का किला - फोटो : Social media
कालिंजर का किला भारत के सबसे विशाल और अपराजेय दुर्गों में गिना जाता रहा है। प्राचीन काल में यह दुर्ग जेजाकभुक्ति (जयशक्ति चन्देल) साम्राज्य के आधीन था। बाद में यह 10वीं शताब्दी तक चन्देल राजपूतों के आधीन और फिर रीवा के सोलंकियों के आधीन रहा। इन राजाओं के शासनकाल में कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक, शेर शाह सूरी और हुमांयू जैसे योद्धाओं ने आक्रमण किए, लेकिन इस पर विजय पाने में असफल रहे। कालिंजर विजय अभियान में ही तोप का गोला लगने से शेरशाह की मृत्यु हो गई थी। बाद में मुगल बादशाह अकबर ने इस पर अधिकार कर लिया और किले बीरबल को तोहफे में दे दिया। 

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कालिंजर के किले में मौजूद पत्थर की मूर्तियां - फोटो : Social media
इस किले में कई प्राचीन मंदिर भी हैं। इनमें से कई मंदिर तीसरी से पांचवीं सदी यानी गुप्तकाल के हैं। यहां के शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि सागर-मंथन से निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव ने यहीं तपस्या कर उसकी ज्वाला शांत की थी। 
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कालिंजर के किले में मौजूद नीलकंठ मंदिर - फोटो : Social media
यहां स्थित नीलकंठ मंदिर को कालिंजर के प्रांगण में सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण और पूज्यनीय माना गया है। कहते हैं कि इसका निर्माण नागों ने कराया था। इस मंदिर का जिक्र पुराणों में भी है। इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है, जिसे बेहद प्राचीनतम माना गया है। 
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कालिंजर के किले में मौजूद जल का स्रोत - फोटो : Social media
नीलकंठ मंदिर के ऊपर ही जल का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो कभी सूखता नहीं है। इसी जल से मंदिर में मौजूद शिवलिंग का अभिषेक निरंतर प्राकृतिक तरीके से होता रहता है। वैसे बुंदेलखंड का यह इलाका सूखे के कारण जाना जाता है, लेकिन यहां कितना भी सूखा पड़े, जल का यह स्रोत कभी नहीं सूखता है। 
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कालिंजर का किला - फोटो : Social media
कहते हैं कि कालिंजर के किले में कई रहस्यमयी छोटी-बड़ी गुफाएं भी मौजूद हैं। इन गुफाओं के रास्तों की शुरुआत तो किले से ही होती है, लेकिन यह कहां जाकर खत्म होती है, यह कोई नहीं जानता। 

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कालिंजर के किले में मौजूद रानी महल - फोटो : Social media
जमीन से 800 फीट की ऊंची पहाड़ी पर बना कालिंजर का यह किला जितना शांत है, उतना ही खौफनाक भी। कहते हैं कि रात होते ही यहां एक अजीब सी हलचल पैदा हो जाती है। लोगों का मानना है कि यहां मौजूद रानी महल से रात को अक्सर घुंघरुओं की आवाज सुनाई देती है। यही वजह है कि यहां दिन के समय तो लोग घूमने के लिए आते हैं, लेकिन रात होने से पहले ही वो यहां से निकल जाते हैं। 

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कालिंजर का किला - फोटो : Social media
इस किले में प्रवेश के लिए सात दरवाजे बने हुए हैं और ये सभी दरवाजे एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। यहां के स्तंभों और दीवारों में कई प्रतिलिपियां बनी हुई हैं। मान्यता है कि प्रतिलिपियों में यहां मौजूद खजाने का रहस्य छुपा हुआ है, जिसे अब तक कोई भी ढूंढ नहीं पाया है। 
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कालिंजर का किला - फोटो : Social media
इस किले में सीता सेज नामक एक छोटी सी गुफा है, जहां एक पत्थर का पलंग और तकिया रखा हुआ है। माना जाता है कि यह जगह माता सीता की विश्रामस्थली थी। यहीं एक कुंड भी है, जो सीताकुंड कहलाता है। किले में बुड्ढा और बुड्ढी नामक दो ताल हैं, जिसके जल को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। मान्यता है कि इनका जल चर्म रोगों के लिए लाभदायक है और इसमें स्नान करने से कुष्ठ रोग भी ठीक हो जाता है।
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