सांकेतिक तस्वीर
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भारत में दारा शिकोह को एक उदार चरित्र माना जाता है। भारत में हिंदू- झुकाव वाले इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह मुगलिया सल्तनत के तख्त पर बैठते तो देश की स्थिति बिल्कुल अलग होती। ये इतिहासकार औरंगजब को एक 'सख्त, कट्टरपंथी और भेदभाव करने वाला' मुसलमान मानते हैं।
उनके अनुसार, वो हिंदुओं से नफरत करते थे और उन्होंने कई मंदिरों को ध्वस्त कराया था। यह धारणा वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में और भी ज्यादा मजबूत हो गई है। बीबीसी ने जिन इतिहासकारों से बात की है, उनका मानना है कि औरंगजेब के विपरीत, दारा शिकोह हिंदू धर्म से प्रभावित थे और वो हिंदूओं की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते थे।
हिंदू वैचारिक संगठन आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा ने भारत में मुस्लिम शासकों के लगभग सात सौ साल के शासन को 'हिंदूओं की गुलामी' का दौर कहा है। आधुनिक समय में मुस्लिम शासकों के दौर को, विशेष रूप से मुगल शासकों और घटनाओं को अक्सर भारत के मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।अब यह नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है कि वर्तमान मुसलमानों की तुलना में दारा शिकोह भारत की मिट्टी में ज्यादा घुल मिल गए थे।