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दारा शिकोह: वो मुगल शहजादा जिसकी कब्र की तलाश कर रही है भारत सरकार

Thu, 07 Jan 2021 03:27 PM IST
योगेश जोशी फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

भारत सरकार इन दिनों 17वीं शताब्दी के मुगल शहजादे दारा शिकोह की कब्र तलाश रही है। मुगल बादशाह शाहजहां के समय के इतिहासकारों के लेखन और कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि दारा शिकोह को दिल्ली में हुमायूं के मकबरे में कहीं दफन किया गया था।भारत सरकार ने दारा की कब्र को पहचानने के लिए पुरातत्वविदों की एक कमेटी बनाई है जो साहित्य, कला और वास्तुकला के आधार पर उनकी कब्र की पहचान करने की कोशिश कर रही है। दारा शिकोह शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र थे। मुग़ल परंपरा के अनुसार, अपने पिता के बाद वे सिंहासन के उत्तराधिकारी थे। लेकिन शाहजहां की बीमारी के बाद उनके दूसरे पुत्र औरंगजेब ने अपने पिता को सिंहासन से हटाकर, उन्हें आगरा में कैद कर दिया था।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Facebook/Nilofer A J

औरंगजेब ने खुद को बादशाह घोषित कर दिया और सिंहासन की लड़ाई में दारा शिकोह को हराकर जेल भेज दिया। शाहजहां के शाही इतिहासकार मोहम्मद सालेह कम्बोह लाहौरी ने अपनी पुस्तक 'शाहजहां नामा' में लिखा है, "जब शहजादे दारा शिकोह को गिरफ्तार करके दिल्ली लाया गया, तब उनके शरीर पर मैले कुचैले कपड़े थे। यहां से, उन्हें बहुत ही बुरी हालत में, बागी की तरह हाथी पर सवार करके खिजराबाद पहुंचाया गया। कुछ समय के लिए उन्हें एक संकीर्ण और अंधेरी जगह में रखा गया था। इसके कुछ ही दिनों के भीतर उनकी मौत का आदेश दे दिया गया।"वो लिखते हैं कि "कुछ जल्लाद उनका कत्ल करने के लिए जेल में दाखिल हुए और क्षण भर में उनके गले पर खंजर चलाकर उनकी हत्या कर दी। बाद में उन्हीं मैले और खून से सने कपड़ों में उनके शरीर को हुमायूं के मकबरे में दफ्न कर दिया गया।"

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

उसी दौर के एक अन्य इतिहासकार, मोहम्मद काजिम इब्ने मोहम्मद अमीन मुंशी ने अपनी पुस्तक 'आलमगीर नामा' में भी दारा शिकोह की कब्र के बारे में लिखा है। वो लिखते हैं, "दारा को हुमायूं के मकबरे में उस गुंबद के नीचे दफनाया गया था जहां बादशाह अकबर के बेटे दानियाल और मुराद दफ्न हैं और जहां बाद में अन्य तैमूरी वंश के शहजादों और शहजादियों को दफ्न किया गया था।"पाकिस्तान के एक स्कॉलर, अहमद नबी खान ने 1969 में लाहौर में 'दीवान-ए-दारा दारा शिकोह' के नाम से एक शोध-पत्र में दारा की कब्र की एक तस्वीर प्रकाशित की थी। उनके अनुसार, उत्तर-पश्चिम कक्ष में स्थित तीन कब्रें पुरुषों की हैं और उनमें से जो कब्र दरवाजे की तरफ है वो दारा शिकोह की है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दारा की कब्र पहचानने में मुश्किल क्या है?

हुमायूं के विशाल मकबरे में हुमायूं के अलावा कई कब्रें हैं। उनमें से मकबरे के बीच में स्थित केवल हुमायूं की ही एक ऐसी कब्र है जिसकी पहचान हुई है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहासकार प्रोफेसर शिरीन मौसवी कहती हैं, "चूंकि हुमायूं के मकबरे में किसी भी कब्र पर कोई शिलालेख लगा हुआ नहीं है, इसलिए कौन किस कब्र में दफ्न है, पता नहीं।"

सरकार ने दारा की कब्र की पहचान करने के लिए पुरातत्वविदों की जो टीम बनाई है, उसमें पुरातत्व विभाग के पूर्व प्रमुख डॉक्टर सैयद जमाल हसन भी शामिल हैं। वो कहते हैं, "यहां लगभग एक सौ पचास कब्रें हैं जिनकी अभी तक पहचान नहीं हुई है। यह पहचान का पहला प्रयास है।"वो कहते हैं कि "हुमायूं के मकबरे के मुख्य गुंबद के नीचे जो कक्ष बने हुए हैं, हम वहां बनी कब्रों का निरीक्षण करेंगे। उन कब्रों के डिजाइन को देखेंगे। अगर कहीं कुछ लिखा हो तो उसकी तलाश करेंगे।कला और वास्तुकला के दृष्टिकोण से हम लोग यह कोशिश करेंगे कि दारा की कब्र पहचानी जा सके।" उनका मानना है कि यह काम बहुत मुश्किल है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • भारत सरकार को कब्र की तलाश क्यों है?

दारा शिकोह शाहजहां के उत्तराधिकारी थे। वो भारत का एक ऐसा बादशाह बनने का सपना देख रहे थे जो बादशाहत के साथ-साथ दर्शन, सूफिज्म और आध्यात्मिकता पर भी महारत रखता हो। उनके बारे में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, वो अपने समय के प्रमुख हिन्दुओं, बौद्धों, जैनियों, ईसाईयों और मुस्लिम सूफियों के साथ उनके धार्मिक विचारों पर चर्चा करते थे। इस्लाम के साथ, उनकी हिंदू धर्म में भी गहरी रुचि थी और वो सभी धर्मों को समानता की नजर से देखते थे।

उन्होंने बनारस से पंडितों को बुलाया और उनकी मदद से हिंदू धर्म के 'उपनिषदों' का फारसी भाषा में अनुवाद कराया था। उपनिषदों का यह फारसी अनुवाद यूरोप तक पहुंचा और वहां उनका अनुवाद लैटिन भाषा में हुआ जिसने उपनिषदों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बनाया।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

भारत में दारा शिकोह को एक उदार चरित्र माना जाता है। भारत में हिंदू- झुकाव वाले इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह मुगलिया सल्तनत के तख्त पर बैठते तो देश की स्थिति बिल्कुल अलग होती। ये इतिहासकार औरंगजब को एक 'सख्त, कट्टरपंथी और भेदभाव करने वाला' मुसलमान मानते हैं।

उनके अनुसार, वो हिंदुओं से नफरत करते थे और उन्होंने कई मंदिरों को ध्वस्त कराया था। यह धारणा वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में और भी ज्यादा मजबूत हो गई है। बीबीसी ने जिन इतिहासकारों से बात की है, उनका मानना है कि औरंगजेब के विपरीत, दारा शिकोह हिंदू धर्म से प्रभावित थे और वो हिंदूओं की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते थे।

हिंदू वैचारिक संगठन आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा ने भारत में मुस्लिम शासकों के लगभग सात सौ साल के शासन को 'हिंदूओं की गुलामी' का दौर कहा है। आधुनिक समय में मुस्लिम शासकों के दौर को, विशेष रूप से मुगल शासकों और घटनाओं को अक्सर भारत के मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।अब यह नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है कि वर्तमान मुसलमानों की तुलना में दारा शिकोह भारत की मिट्टी में ज्यादा घुल मिल गए थे।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
  • भारत सरकार कब्र पर क्या करेगी?
भारत सरकार दारा शिकोह को एक आदर्श, उदार मुस्लिम चरित्र मानती है और इसीलिए वो दारा को मुसलमानों के लिए आदर्श बनाना चाहती है। उनके विचारों को उजागर करने के लिए, यह संभव है कि मुगल शहजादे की कब्र की पहचान होने के बाद धार्मिक सद्भाव का कोई वार्षिक उत्सव या कोई कार्यक्रम शुरू किया जाए। सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा के नेता सैयद जफर इस्लाम का कहना है कि "दारा शिकोह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने सभी धर्मों का अध्ययन किया और एक शांति अभियान चलाया। वे सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलने में विश्वास करते थे। इसका उन्हें परिणाम भी भुगतना पड़ा। आज के मुस्लिम समाज में भी दारा जैसी सोच और समझ की बहुत आवश्यकता है।"

दारा शिकोह को मुसलमानों के लिए एक आदर्श के रूप में पेश करने का विचार इस धारणा पर आधारित है कि मुसलमान भारत के धर्मों और यहाँ के रीति-रिवाजों में पूरी तरह से नहीं घुल मिल सके हैं और ना ही इसे अपना सके हैं। हालांकि, कुछ आलोचक यह सवाल भी पूछते हैं कि दारा शिकोह को उनकी उदारता और धार्मिक एकता के विचारों के लिए केवल मुसलमानों का ही क्यों, पूरे देश का रोल मॉडल क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए?
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