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Moon: चीन के रोवर ने चांद पर खोज निकाली ऐसी चीज, हैरत में पड़ी दुनिया

Mon, 21 Aug 2023 01:31 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
Moon: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (isro) ने चंद्रयान मिशन-3 ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लाॅन्च किया था। 40 दिनों की लंबी यात्रा के बाद चंद्रयान-3 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश करेगा। चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर भारत के साथ ही दुनियाभर की नजर टिकी हुई है। इससे पहले चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चांद की कुछ दिलचस्प तस्वीरों को भेजा है। इसरो ने ट्विटर पर इन तस्वीर को शेयर किया है। लैंडर में लगा कैमरा लैंडिंग के दौरान बोल्डर और गहरी खाइयों के बारे में जानकारी देता रहता है। अब इस बीच चीन के रोवर ने ऐसी खोज की है जिससे दुनिया हैरान है। 



चीन ने चांग ई-4 अंतरिक्ष यान को साल 2018 में लॉन्च किया गया था और इस मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता भी मिली। चीन का यह चांद के दूसरे हिस्से पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान है। यह अंतरिक्षयान आश्चर्यजनक तस्वीरें खींच रहा है और चंद्रमा के मैंटल से खनिजों का नमूना इकट्ठा कर रहा है। अंतरिक्ष यान की खोज ने वैज्ञानिकों को सफलता दिलाई है। इससे वैज्ञानिक चांद की परत को और बेहतर तरीके से देखने में सक्षम हो चुके हैं।
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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : NASA
चीन ने चांग ई-4 की खोज से वैज्ञानिक चांद की ऊपरी सतह के 1000 फीट को कहीं अधिक सूक्ष्मता के साथ देख सकते हैं।  जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स में इस शोध का परिणाम प्रकाशित किया गया था। इस शोध से अरबों सालों के छिपे चंद्रमा का इतिहास दिखाई देता है। 
 
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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
चीन ने चांग ई-4 के साथ युतु-2 नाम का एक रोवर भी चंद्रमा पर भेजा था। इस रोवर में लूनर पेनेट्रेटिंग रडार (LPR) नाम की टेक्नोलॉजी लगी है। एरिजोना के टक्सन में प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के खगोलीय शोधकर्ता और इस शोध को लिखने वाले जियानकिंग फेंग का कहना है कि यह उपकरण रोवर को चांद की सतह में गहराई तक रेडियो सिग्नल भेजने में सक्षम बनाता है। इसके बाद यह टकराता है और आने वाले सिग्नल को सुनता है। वैज्ञानिक की तरफ से चंद्रमा की उपसतह का नक्शा बनाने के लिए लौटकर आने वाली इन तरंगों का इस्तेमाल करते हैं। 
 

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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
सतह की गहराई में क्या मिला

वैज्ञानिकों ने साल 2020 में युतु-2 के एलपीआर का इस्तेमाल कर चंद्रमा की सतह के ऊपरी 40 मीटर को मैप किया था, लेकिन अभी तक यह और गहराई में नहीं पहुंच पाया था। फेंग ने बताया कि अभी तक के आंकड़ों से पता चलता है कि चांद की सतह से 130 फीट की गहराई तक के हिस्से का धूल, मिट्टी और टूटी चट्टानों की कई परतों से निर्माण हुआ है। एक क्रेटर यानी गड्ढे के अंदर यह सभी चीजें मिली हैं जिसका निर्माण एक टक्कर के बाद हुआ होगा।

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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
 फेंग और उनके साथियों का मानना है कि टक्कर की वजह से संरचना के आसपास का मलबा बाहर आया है। वैज्ञानिकों ने इसके नीचे चांद के लावा की पांच अलग-अलग परतों को खोजा है। 

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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 4.51 अरब साल पहले चंद्रमा का निर्माण हुआ था। उनका मानना है कि धरती से मंगल ग्रह के आकार की एक वस्तु की टक्कर हुई थी और पृथ्वी का एक हिस्सा टूट गया था।

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China's E 4 rover maps 1000 feet of hidden structures deep below the dark side of the moon - फोटो : iStock
इसके बाद 20 करोड़ सालों तक अंतरिक्ष से चांद पर चीजें गिरती रहीं। इनमें दरारे थीं और उनमें लावा बहता था। चांग ई-4 के नए डेटा से पता चलता है कि समय के साथ यह प्रक्रिया धीमी हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक अरब साल पहले चांद पर ज्वालामुखीय गतिविधियां समाप्त हो गईं। 
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