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Highest Shiva Temple: दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, जानिए अर्जुन से क्या है इसका कनेक्शन

Fri, 08 Mar 2024 02:28 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Tungnath Temple - फोटो : x/@LostTemple7
Tungnath Temple Uttarakhand: भगवान शिव को देवों का देव महादेव भी कहा जाता है। भारत में उत्तर से दक्षिण तक शिव जी के कई मंदिर स्थित हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ऊंचा शिव मंदिर कौन सा है? अगर नहीं तो आइए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं। दरअसल दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर उत्तराखंड में है, जिसे तुंगनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। तुंगनाथ भगवान शिव के पंच केदार में से एक है। उत्तराखंड में शिव जी के 5 प्राचीन और पवित्र मंदिर स्थित हैं, जिन्हें पंच केदार कहा जाता हैं। आइए महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव के सबसे ऊंचे मंदिर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं। साथ ही जानेंगे कि इस मंदिर का महाभारत के अर्जुन से क्या संबंध है।

तुंगनाथ मंदिर 3,680 मीटर यानी 12,073 फीट की ऊंचाई पर चन्द्रनाथ नाम के पर्वत पर मौजूद है। यह उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ 'चोटियों के भगवान' है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल जितना पुराना बताया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, तुंगनाथ मंदिर की नींव महाभारत के अर्जुन द्वारा रखी गई थी।
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Tungnath Temple - फोटो : x/All India Radio News
तुंगनाथ मंदिर और महाभारत से जुड़ी पौराणिक कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार, तुंगनाथ मंदिर के निर्माण को लेकर मान्यता है कि हजारों साल पहले पांडव भाइयों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक मंदिर की स्थापना की थी। दरअसल, महाभारत के युद्ध में पांडवों ने अपने ही भाइयों और गुरुओं का वध किया था। ऐसे में पांडवों पर अपने ही रिश्तेदारों की हत्या का पाप था, इसलिए ऋषि व्यास ने पांडवों से कहा कि वह तभी पाप मुक्त हो सकते हैं, जब भगवान शिव खुद उन्हें माफ करेंगे। इसके बाद पांडवों ने शिव जी की तलाश शुरू कर दी और वे हिमालय जा पहुंचे।
 
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Tungnath Temple - फोटो : x/@desi_thug1
बहुत परिश्रम के बाद भोलेनाथ एक भैंस के रूप में दर्शन देते हैं। हालांकि, इसके बाद भी भगवान शिव ने उन्हें टाल दिया क्योंकि पांडव दोषी थे। तब शिव जी भूमिगत हो गए और बाद में उनके शरीर यानी भैंस के पांच अंग अलग-अलग जगहों पर उठ गए। इन पांचो जगहों पर पांडवों ने शिव मंदिर बनवाएं। इन पंच केदार के प्रत्येक मंदिर को भगवान शिव के शरीर के एक अंग के साथ पहचाना जाता है। तुंगनाथ पंच केदार में से तीसरा (तृतीय केदार) है, जहां भगवान शिव के हाथ मिले थे। इसी के आधार पर मंदिर का नाम भी रखा गया। तुंग का अर्थ हाथ और नाथ भगवान के संदर्भ में कहा गया है।

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Tungnath Temple - फोटो : x/@desi_thug1
पंच केदार में इसके अलावा केदारनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर मंदिर आते हैं। केदारनाथ में भगवान शिव की कूबड़ प्रकट हुई थी। रुद्रनाथ में उनका सिर, कल्पेश्वर में बाल, जबकि मध्यमहेश्वर मंदिर में शिव जी की नाभि प्रकट हुई थी।
 
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Tungnath Temple - फोटो : x/@shubhamtorres09
यह जगह बेहद ठंडी है। सर्दियों के मौसम में यह बर्फ की चादर में ढक जाती है और तापमान इतना गिर जाता है कि इस दौरान मंदिर बंद कर दिया जाता है। इस दौरान देवता की प्रतीकात्मक मूर्ति और पुजारियों को मुख्य मंदिर से 19 किलोमीटर दूर मुक्कुमठ में ले जाया जाता है। हालांकि अप्रैल से नवंबर माह के बीच मुख्य मंदिर में ही पूजा और दर्शन किए जाते हैं।
 
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