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नींद में जबरदस्त कलाकारी करता है ये इंसान, जागने के बाद नहीं रहता कुछ याद

Thu, 01 Aug 2019 01:52 PM IST
पंखुड़ी सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : youtube
बहुत से लोगों को नींद में चलने या बड़बड़ाने की बीमारी होती है. लेकिन, एक ऐसा इंसान है, जो नींद में तस्वीरें बनाता है. इनका नाम है ली हैडविन. वो ब्रिटेन के वेल्श सूबे के कार्डिफ़ शहर में रहते हैं. ली हैडविन जब केवल चार बरस के थे, तो उन्होंने दीवार पर चित्र बनाने शुरू कर दिए थे. अब आप कहेंगे कि भला कौन सा बच्चा इस उम्र मे दीवारें नहीं रंगता. बाक़ी बच्चों और ली में फ़र्क़ ये था कि वो सोते वक़्त ड्रॉइंग बनाते थे. जैसे-जैसे वो बड़े होते गए, सोते हुए चित्र बनाने का उनका हुनर और सुधरता गया.






 
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जब वो 15 साल के थे, तो हैडविन ने हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो के तीन पोर्ट्रेट बनाए थे. लेकिन, आज उन्हें इसकी बिल्कुल याद नहीं. मज़े की बात ये है कि सोते वक़्त बारीक चित्र बनाने वाले ली हैडविन जागते हुए कोई चित्रकारी नहीं कर पाते. ली की इस हैरान कर देने वाली कला के बारे में कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी की पेनी लुइस ने रिसर्च की है. उनका कहना है कि सोते वक़्त चित्र बनाना, उनके आधे सोए और आधे जागे मस्तिष्क की वजह से है. पेनी लुइस का कहना है कि लोग नींद में करवट बदलते हैं. बड़बड़ाते हैं या फिर चलने लगते हैं. ये सब हमारे दिमाग़ में मची उथल-पुथल का नतीजा होता है. ये बहुत सामान्य घटना है.
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लेकिन, ली हैडविन का मामला इससे भी आगे चला गया है. वो पेंसिल, ब्रश और यहां तक कि हड्डियों से भी चित्र गढ़ने लगते हैं. ये सामान्य बात होती, अगर वो जागते हुए ऐसा करते. पेनी लुइस कहती हैं कि ली के दिमाग़ की बनावट और काम करने का तरीक़ा, दोनों ही बहुत पेचीदा हैं. वो इस मसले को समझने की कोशिश कर रही हैं. वो कहती हैं कि जब हम सो रहे होते हैं, तो ये मान कर चलते हैं कि हमारा ज़हन भी सो रहा है. लेकिन, हमारे दिमाग़ का एक हिस्सा उस वक़्त भी बहुत सक्रिय होता है.

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वो जागते वक़्त किए जाने वाले काम का अभ्यास करता है. नई बातें और हुनर सीखता है. यादें संजोता है. हमारे मस्तिष्क के पास इतना काम होता है कि उसके पास सोने की फ़ुरसत ही नहीं होती है. ली हैडविन इस बात से इत्तिफ़ाक़ रखते हैं. वो कहते हैं कि सोते समय उनके ज़हन में किसी कला प्रदर्शनी का ख्याल आता है. जिसमें अलग-अलग सेक्शन होते हैं. अक्सर वो इन्हीं सेक्शन के हिसाब से चित्रकारी करते हैं. पेनी लुइस कहती हैं कि सोते वक़्त हमारे दिमाग़ के तर्क गढ़ने वाले हिस्से को नींद आ जाती है. लेकिन, दिमाग़ का वो हिस्सा जो जज़्बात महसूस करता है और उन्हें नियंत्रित करता है, वो जागता रहता है. इसे लिम्बिक ब्रेन कहते हैं. जो सोते हुए भी जागता रहता है. पेनी लुइस के मुताबिक़, ली हैडविन के ज़हन में जो होता हुआ हम देख रहे हैं, उसका ताल्लुक़ इंसान के इवोल्युशन यानी क़ुदरती विकास की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है
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आदि मानव जब जंगल में रहते थे, तो उन्हें सोते समय भी चौकन्ना रहना होता था. ताकि कोई ख़तरा आए तो वो फ़ौरन वहां से बचने के लिए भाग सकें. ली हैडविन अपनी इस आदत की वजह से कई बार बहुत परेशान भी हो जाते हैं. रात के वक़्त अचानक जागते हैं, तो पसीने-पसीने हो जाते हैं. डर लगता है. घबराहट होती है. पेनी लुइस कहती है कि सोते हुए लोग हत्या, बलात्कार और चोरी जैसी घिनौनी हरकतें कर डालते हैं. ऐसे में ली हैडविन सोते हुए चित्र बनाते हैं, तो ये अच्छी बात है कि अपने दिमाग़ के इस उलट-फ़ेर से वो अपराध की तरफ़ नहीं झुके, बल्कि उन्होंने कला की नुमाइश शुरू की.
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पेनी का कहना है कि जागते वक़्त ली हैडविन को अपनी कला का हुनर याद नहीं रहता, इसकी वजह ये हो सकती है कि दिमाग़ पूरी तरह से इस बात को मानने को तैयार नहीं कि उन्हें ये फ़न आता है. जब ये ज़हनी बाधा दूर कर दी जाएगी, तो शायद वो जागते हुए भी ख़ूबसूरत चित्र बना सकेंगे.
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