लेकिन, ली हैडविन का मामला इससे भी आगे चला गया है. वो पेंसिल, ब्रश और यहां तक कि हड्डियों से भी चित्र गढ़ने लगते हैं. ये सामान्य बात होती, अगर वो जागते हुए ऐसा करते. पेनी लुइस कहती हैं कि ली के दिमाग़ की बनावट और काम करने का तरीक़ा, दोनों ही बहुत पेचीदा हैं. वो इस मसले को समझने की कोशिश कर रही हैं. वो कहती हैं कि जब हम सो रहे होते हैं, तो ये मान कर चलते हैं कि हमारा ज़हन भी सो रहा है. लेकिन, हमारे दिमाग़ का एक हिस्सा उस वक़्त भी बहुत सक्रिय होता है.