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भारत में इस जगह होती है कुत्ते की पूजा, कुकुरदेव मंदिर की अजीबोगरीब मान्यता जान कर हो जाएंगे हैरान

Wed, 06 Mar 2019 08:20 PM IST
संदीप भट्ट फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
अब तक तो आपने सिर्फ देवी-देवताओं के ही मंदिर के बारे में सुना होगा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जिसमें कुत्ते ही पूजा होती है। इस मंदिर को कुकुरदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां की अजीबोगरीब मान्यता और इस मंदिर के निर्माण की कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे। 
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
कुकुरदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के रायपुर से करीब 132 किलोमीटर दूर दुर्ग जिले के खपरी गांव में स्थित है। इस मंदिर के गर्भगृह में कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है, जबकि उसके बगल में एक शिवलिंग भी है। सावन के महीने में इस मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। लोग शिव जी के साथ-साथ कुत्ते (कुकुरदेव) की भी वैसे ही पूजा करते हैं जैसे शिवमंदिरों में नंदी की पूजा होती है। 
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
यह मंदिर 200 मीटर के दायरे में फैला हुआ है। मंदिर के मंदिर के गर्भगृह के अलावा यहां के प्रवेश द्वार पर भी दोनों ओर कुत्तों की प्रतिमा लगाई गई है। मान्यता है कि कुकुरदेव का दर्शन करने से न कुकुरखांसी होने का डर रहता है और न ही कुत्ते के काटने का खतरा रहता है। 

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Kukurdev temple - फोटो : Social media
दरअसल, कुकुर देव मंदिर एक स्मारक है। एक वफादार कुत्ते की याद में इसे बनाया गया था। कहते हैं कि सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार के साथ इस गांव में आया था। उसके साथ एक कुत्ता भी था। गांव में एक बार अकाल पड़ गया तो बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया, लेकिन वो कर्ज वो वापस नहीं कर पाया। ऐसे में उसने अपना वफादार कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया।  
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
कहते हैं कि एक बार साहूकार के यहां चोरी हो गई। चोरों ने सारा माल जमीन के नीचे गाड़ दिया और सोचा कि बाद में उसे निकाल लेंगे, लेकिन कुत्ते को उस लूटे हुए माल के बारे में पता चल गया और वो साहूकार को वहां तक ले गया। कुत्ते की बताई जगह पर साहूकार ने गड्ढा खोदा तो उसे अपना सारा माल मिल गया। 
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
कुत्ते की वफादारी से खुश होकर साहूकार ने उसे आजाद कर देने का फैसला लिया। इसके लिए उसने बंजारे के नाम एक चिट्ठी लिखी और कुत्ते के गले में लटकाकार उसे उसके मालिक के पास भेज दिया। इधर कुत्ता जैसे ही बंजारे के पास पहुंचा, उसे लगा कि वो साहूकार के पास से भागकर आया है। इसलिए उसने गुस्से में आकर कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। 
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Kukurdev temple - फोटो : Social media
हालांकि बाद में बंजारे ने कुत्ते के गले में लटकी साहूकार की चिट्ठी पढ़ी तो वो हैरान हो गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उसके बाद उसने उसी जगह कुत्ते को दफना दिया और उस पर स्मारक बनवा दिया। स्मारक को बाद में लोगों ने मंदिर का रूप दे दिया, जिसे आज लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं। 
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