मोहम्मद अली जिन्ना
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जिन्ना का भाषण
जिन्ना का 11 अगस्त का भाषण और अल्पसंख्यक इतिहासकारों का मानना है कि 11 अगस्त 1947 को पाकिस्तान के संस्थापक और देश के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना ने संविधान सभा की पहली बैठक में अध्यक्ष के तौर पर अपने भाषण में पाकिस्तान के भविष्य का खाका पेश करते हुए रियासत को मजहब से अलग रखने का ऐलान किया था। उसी भाषण में जिन्ना ने यह भी कहा था कि "समय के साथ हिंदू अब हिंदू नहीं रहेंगे और मुसलमान मुसलमान नहीं रहेंगे। धार्मिक रूप से नहीं, क्योंकि धर्म एक निजी मामला है, बल्कि राजनीतिक रूप से एक देश के नागरिक होने के नाते।"
जिन्ना ने यह भी कहा था, "हम एक ऐसे दौर की तरफ जा रहे हैं जब किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। एक समुदाय को दूसरे पर कोई वरीयता नहीं दी जाएगी। किसी भी जाति या नस्ल के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। हम इस मूल सिद्धांत के साथ अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं कि हम सभी नागरिक हैं और हम सभी इस राज्य के समान नागरिक हैं।"
मोहम्मद अली जिन्ना के इस भाषण से एक दिन पहले संविधान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष और पहले स्पीकर जोगेन्द्र नाथ मंडल ने अपने पाकिस्तान चुनने की वजह बताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने पाकिस्तान को इसलिए चुना क्योंकि उनका मानना था कि "मुस्लिम समुदाय ने भारत में अल्पसंख्यक के रूप में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया है, लिहाजा वो अपने देश में अल्पसंख्यकों के साथ न केवल न्याय करेगा बल्कि उनके प्रति उदारता भी दिखाएगा।"
अमरीका के जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय की गजल आसिफ ने अपने हालिया शोध पत्र 'जोगेन्द्र नाथ मंडल एंड पॉलिटिक्स ऑफ दलित रिकग्निशन इन पाकिस्तान' ('जोगेन्द्र नाथ मंडल और पाकिस्तान में दलितों की मान्यता की राजनीति') में कहा है कि "मंडल ने पाकिस्तान के निर्माण में दलित स्वतंत्रता के सपने को साकार होते हुए देखा था, लेकिन नए राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक के आंतरिक अंतर को समझे बिना (यानी, एक राज्य की विचारधारा के सामने जो अनुसूचित जाति और उच्च जाति के हिंदुओं के बीच अंतर के बिना अल्पसंख्यकों को एक इकाई मानता है), मंडल का विजन टिक नहीं सका।"