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कहानी रूस के एक खुफिया शहर की: जहां रहने वाले लोगों को वोटिंग करने से भी थी मनाही

Mon, 08 Mar 2021 10:01 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खुफिया शहर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
सैन्य तानाशाही के वजह से उत्तर कोरिया से जुड़ी बहुत कम बातें ही दुनियाभर में पहुंचती हैं। इस मुल्क को दुनिया का सबसे कटा हुआ और चुप्पा देश माना जाता है। लेकिन ऐसे कई देश हैं, जो इन सब मामलों में बहुत आगे हैं। अगर बात रूस की ही करें, तो इस देश में तीन ऐसे खुफिया शहर थे, जो हाल ही में दुनिया के सामने आए हैं। कई दशक से इन शहरों को रूस के नक्शे से गायब रखा गया और इसके बारे में कोई पता नहीं लगा सका। इतना ही नहीं इन खुफिया शहरों के पोस्ट कोड भी हटा दिए गए थे।
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खुफिया शहर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
बता दें कि सरोव, इलेक्ट्रोस्टल और देस्नोगॉर्क्स काफी लंबे समय से रूस के खुफिया अड्डे रहे। रूस के ये तीनों शहर एक साथ सोवियत के खुफिया लैब्स का काम करते रहे, जब वो परमाणु हथियार के लिए अमेरिका से होड़ में था। रूस का पहला न्यूक्लियर बम सरोव के साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सपेरिमेंटल फिजिक्स में तैयार किया गया था। खुफिया लैब्स की जानकारी दुनिया के सामने ना आए, इसके लिए इन तीनों शहरों को नक्शे में भी नहीं दिखाया गया था।
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खुफिया शहर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
साल 1990 में सोवियत यूनियन के बंटवारे के दौरान इन तीनों खुफिया शहर की जानकारी दुनिया के सामने आई। इससे पहले इन शहरों तक ट्रेन या बस भी नहीं जाती थी। रूस के बेहद खास लोग ही केवल इस शहर तक पहुंच सकते थे। परमाणु हथियारों पर काम कर रहे वैज्ञानिक, उनका परिवार और रूस में बड़े ओहदों पर बैठे लोगों को ही इन खुफिया शहरों में प्रवेश करने की इजाजत थी।

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खुफिया शहर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
बता दें कि रूस के इन तीनों खुफिया शहरों में अब भी जिंदगी प्रतिबंधित है। इन शहरों में अब टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं, जहां किसी न किसी खुफिया अभियान की तैयारी चलती रहती है। सरोव शहर तो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बाड़े से घिरा हुआ है और पुलिस की पेट्रोलिंग चलती रहती है। इस शहर में बिना पास के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है।
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खुफिया शहर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
इन शहरों में रहने वाले वैज्ञानिकों से कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया जाता, जिसमें अपनी पहचान जाहिर न करने की शपथ होती थी। यहां रहने वाले लोगों को वोट करने का भी अधिकार नहीं मिलता था। हालांकि, सरकार इसके लिए उन्हें काफी सुविधाएं मुहैया कराती थी।
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व्लादिमीर पुतिन - फोटो : Pixabay
इन शहरों में रहने वाले वैज्ञानिकों से कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया जाता, जिसमें अपनी पहचान जाहिर न करने की शपथ होती थी। यहां रहने वाले लोगों को वोट करने का भी अधिकार नहीं मिलता था। हालांकि, सरकार इसके लिए उन्हें काफी सुविधाएं मुहैया कराती थी।
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