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Kolar Gold Fields: इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ, जानिए इसकी अनसुनी कहानी

Wed, 13 Apr 2022 06:19 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : Twitter/ @MahipalRathore/ @santa_banta
Kolar Gold Fields: साउथ की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल केजीएफ 2 (KGF 2) के ट्रेलर ने धमाल मचा दिया है। बेसब्री से इस फिल्म का लोग इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म की कहानी एक सोने की खदान से जुड़ी हुई है जिसका इतिहास 121 साल पुराना है। यह फिल्म रियल लाइफ की घटनाओं पर आधारित है। केजीएफ यानी कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स की कहानी बिल्कुल फिल्म की तरह खूनी है। कर्नाटक के दक्षिण पूर्व इलाके में कोलार गोल्ड फील्ड्स स्थित है। 

साल 1871 में जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था, तो इस दौरान ब्रिटिश सैनिक माइकल फिट्ज़गेराल्ड लेवेली ने बेंगलुरू में अपना घर बनवाया था। वह किताबों और आर्टिकल को पढ़ने में ज्यादातर समय व्यतीत करते थे। उनको भारत के इतिहास के बारे में जानने में उत्सुकता थी। उन्होंने साल 1804 में प्रकाशित एशियाटिक जर्नल का लेख पढ़ा। इस लेख में बताया गया था कि कोलार में लोग हाथ से जमीन खोदते हैं और सोना निकाल लेते हैं। 
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : Twitter @MahipalRathore

क्या है केजीएफ का इतिहास

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केजीएफ से इन सालों में 900 टन सोना निकाला जा चुका है। ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वॉरेन ने इस खान के बारे में लेख लिखा था। उन्होंने अपने इस आर्टिकल में बताया था कि साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को मार दिया। इसके बाद उन्होंने कोलार और आसपास के इलाकों को कब्जा लिया। हालांकि कुछ सालों बाद यह जमीन मैसूर राज्य को सौंप दी गई, लेकिन सर्वे का अधिकार अंग्रेजों के पास ही रहा। 
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : iStock
हाथों से निकाला जाता था सोना

इसे लेख में बताया गया था कि उस दौरान कोलार में चोल साम्राज्य का शासन था। सबसे हैरान वाली बात यह है कि यहां पर लोग हाथ से खोदकर सोना निकाल लेते थे। वॉरेन ने घोषणा की कि सोना निकालने वालों को इनाम दिया जाएगा। इसके बाद जब लोगों ने सोना निकाला तो करीब 56 किलो मिट्टी में थोड़ा सा ही सोना निकला। इसके बाद तकनीक का इस्तेमाल किया गया। 

अंग्रेजों ने 1804 से लेकर 1860 तक सोना निकालने के लिए खतरनाक एक्सपेरिमेंट किए़, लेकिन उनके हाथ कोई कामयाबी नहीं लगी बल्कि कई मजदूरों की मौत हो गई। इसके बाद अंग्रेजों ने खुदाई पर रोक लगा दी।

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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : iStock
 इसके बाद लेवेली के मन में रिसर्च करने का ख्याल आया है और कोलार पहुंच गए।  मैसूर के महाराज साल 1873 में लेवेली को कोलार में खुदाई की इजाजत दी। 1875 में फिर से खुदाई शुरू की गई। रोशनी के लिए यहां पर बिजली का इंतजाम किया गया। कोलार भारत का पहला शहर है जहां पर सबसे पहले बिजली पहुंची थी। लेवेली की कोशिशों के बाद 1902 में केजीएफ में 95 प्रतिशत सोना निकाले जाने लगा। साल 1930 तक इस खान में 30 हजार मजूदर खुदाई करने लगे थे। 
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : iStock
केजीएफ में लग गया अंग्रेजों का जमावड़ा

अंग्रेजों की सबसे पसंदीदा जगह बन गई कोलार गोल्ड फील्ड्स। ब्रिटिश अधिकारियों और इंजीनियर्स ने यहां पर अपना-अपना घर बनाना शुरू कर दिया। ठंडा होने की वजह से यह एक वैकेशन स्पॉट की तरह था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक समय केजीएफ को छोटा इंग्लैंड कहा जाता था। 
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : iStock

अब बन गया खंडहर

आजादी के बाद केजीएफ की खादानों पर भारत सरकार का कब्जा हो गया है। साल 1956 में इस सोने की खान का राष्ट्रीयकरण हो गया। भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड कंपनी ने साल 1970 में यहां पर सोना निकालने का काम शुरू किया। इस खदानों से सरकार को शुरुआत में तो फायदा हुआ, लेकिन 1980 का दौर आने तक कंपनी घाटे में पहुंच गई। 
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इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ - फोटो : iStock
कंपनी के पास मजदूरों को देने के लिए आमदनी नहीं बची। साल 2001 में यहां पर खुदाई बंद कर दी गई। इसके बाद से कोलार गोल्ड फील्ड्स खंडहर में तब्दील हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि केजीएफ में अभी भी सोना है। 
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