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झारखंड के शिक्षा मंत्री 53 साल की उम्र में बने छात्र,11वीं में लिया एडमिशन

Wed, 12 Aug 2020 09:08 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो सुर्खियों में हैं। वजह बना है उनका इंटरमीडिएट में एडमिशन लेना। वे सिर्फ मैट्रिक (दसवीं) पास थे। यह परीक्षा भी उन्होंने 28 साल की उम्र में पास की थी। अगर उनकी पढ़ाई ठीक चली, तो वे 55 साल की उम्र में इंटर (बारहवीं) की परीक्षा पास करेंगे। बचपन की गरीबी और बाद के सालों में झारखंड आंदोलन में सक्रियता के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई थी। अब अपनी पढ़ाई को फिर से शुरू करने को लेकर वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने पहले विषय के बतौर राजनीति शास्त्र का चुनाव किया है। उनका मानना है कि पॉलिटिक्स (राजनीति) करने वाले व्यक्ति को पॉलिटिकल साइंस (राजनीति शास्त्र) तो पढ़ना ही चाहिए।
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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
गरीबी शिक्षा में बाधक
उन्होंने बीबीसी से कहा, "परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पांच भाई-बहनों वाले परिवार में सबको सिस्टमेटिक तरीके से पढ़ा पाना मेरे पिताजी के लिए संभव नहीं था। प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई शुरू तो की लेकिन मैट्रिक पास करने से पहले ही रुक गई। तब तक झारखंड आंदोलन की शुरुआत हो चुकी थी।"

"मेरे ऊपर विनोद बिहारी महतो और गुरुजी (शिबू सोरेन) का बड़ा प्रभाव पड़ा, तो मैं झारखंड आंदोलन में शामिल हो गया। अलग राज्य की लड़ाई लड़ने में कभी यहां, कभी वहां रातें गुजारीं। इसी दौरान वक्त निकाल कर पढ़ाई भी की और सन-1995 में मैट्रिक पास कर गया। फिर पढ़ाई रुक गई।"
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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
अब क्यों लिया एडमिशन?
जगरनाथ महतो ने कहा, "जब शिक्षा मंत्री पद की शपथ ले रहा था, तभी कुछ व्हाइट कालर लोगों ने मेरी शैक्षणिक योग्यता को लेकर छींटाकशी की। वे अंग्रजी बोलने वाले लोग थे। उन्हें यह नहीं पता था कि लोकतंत्र में मंत्री बनने के लिए जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि होना जरुरी है। इसके लिए संविधान ने कोई शैक्षणिक योग्यता तय नहीं की है। तभी मुझे लगा कि इन्हें जवाब देना चाहिए और मैंने आगे की पढ़ाई पूरी करने का निर्णय लिया।"

उन्होंने यह भी कहा, "गरीबी के कारण मेरी पढ़ाई बीच में रुकी थी। अब ऐसा और किसी के साथ नहीं हो, इललिए हमारी सरकार ने हर पंचायत के एक स्कूल को लीडर (माडल) स्कूल बनाने का निर्णय लिया है। इन स्कूलों में अंग्रेजी की भी पढ़ाई करायी जाएगी, ताकि गरीबों के बच्चे भी महंगे प्राईवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तरह अंग्रेजी बोल सकें।"

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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
यहां हर आधुनिक सुविधाएं देंगे। पढ़ाई की उत्तम व्यवस्था करेंगे। यह निर्णय हम इस कारण ले सके, क्योंकि मैंने गरीबी देखी है। अपनी पढ़ाई बीच में रुकते देखी है। यह अनुभव मुझे मेरे शैक्षणिक डिग्री से नहीं, बल्कि समाज से मिला है। मेरी आलोचना करने वाले यह नहीं समझ सकेंगे। इसलिए मुझे उनकी टिप्पणियों की ज्यादा परवाह भी नहीं है।

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने बोकारो जिले के नवाडीह स्थित देवी प्रसाद मेमोरियल इंटर कालेज में एडमिशन लिया है। यहां के प्रिंसिपल दिनेश प्रसाद बर्णवाल ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि न केवल शिक्षक बल्कि यहां के छात्र भी मंत्री जी के नामांकन से खुश हैं। इस कालेज तो किसी वक्त जगरनाथ महतो ने ही खुलवाया था। वे इसकी मैनेजिंग कमेटी में भी हैं।
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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
शिक्षा के पैमाने पर झारखंड का मंत्रिमंडल
झारखंड की मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार में मुख्यमंत्री समेत आठ मंत्रियों ने सिर्फ बारहवीं तक की ही पढ़ाई की है। दो मंत्री ग्रेजुएट हैं और एक मंत्री आइपीएस रह चुके हैं। उन्होंने पीएचडी भी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिष्टित बीआइटी मेसरा में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था लेकिन उन्होंने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। वे राजनीति में आ गए। उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और पूर्व आइपीएस अधिकारी डा रामेश्वर उरांव कहते हैं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो ने अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की है, तो यह काबिल-ए-तारीफ है। उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। यह साहसिक कदम है।
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जगरनाथ महतो - फोटो : BBC
राजनीति के पड़ाव पर आकर ऐसा निर्णय लेना आसान नहीं होता। भारत की संसद में आज भी कई वैसे सदस्य हैं, जिन्होंने सिर्फ मैट्रिक की पढ़ाई की है। इसका मतलब यह तो नहीं कि वे काबिल नहीं हैं। आप कबीर के दोहों पर शोध करके पीएचडी कर रहे हैं, क्या कबीर ने किसी स्कूल में औपचारिक शिक्षा ली थी। शिक्षा मंत्री द्वारा एडमिशन लिए जाने के लोकर सोशल मीडिया पर बी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। जहां उनके आलोचक इस संबंधित खबरों की कतरने लगाकर उनका उपहास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके प्रशंसकों का तर्क है कि बीजेपी नेताओं की कथित फर्जी डिग्रियों वाले सर्टिफिकेट से तो अच्छा है कि कोई एडमिशन लेकर पढ़ाई करे।
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