प्रतीकात्मक तस्वीर
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हालांकि, अदालत का फैसला आने में चार साल लग गए और लड़की की उम्र 21 साल हो गई है। अदालत ने राहत देते हुए आदेश दिया कि लड़की को हर्जाने के तौर पर 3,30,000 येन (करीब 2.27 लाख रु.) का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने कहा कि भले ही स्कूल के नियम सही है, लेकिन इससे एक स्टूडेंट को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे उसकी शिक्षा प्रभावित हुई।