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पैंगोंग झील से जुड़ी रोचक बातें, कुबेर की 'दिव्य नगरी' इसी के आसपास है कहीं!

Sat, 02 May 2020 04:56 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पैंगोंग झील - फोटो : Social media
क्या आपने कभी पैंगोंग झील का नाम सुना है? इसे 'पांगोंग त्सो' के नाम से भी जाना जाता है। यह हिमालय में बसी एक ऐसी झील है, जो लगभग 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 135 किलोमीटर लंबी यह झील करीब 604 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और अपने सबसे विस्तारित बिंदु पर यह छह किलोमीटर चौड़ी है। खारे पानी की इस झील की सबसे खास बात ये है कि यह शीत ऋतु में पूरी तरह जम जाती है, जिसके बाद आप चाहें तो उसपर गाड़ी भी चला सकते हैं या आइस स्केटिंग या फिर पोलो भी खेल सकते हैं। हालांकि इसके लिए विशेष इजाजत लेनी पड़ती है। 
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पैंगोंग झील - फोटो : Social media
आपको शायद पता न हो, लेकिन इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत (लद्दाख) में स्थित है, जबकि इसका 90 किलोमीटर क्षेत्र तिब्बत (चीन) में पड़ता है। माना जाता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) इस झील के मध्य से होकर गुजरती है। हालांकि इसकी सटीक स्थिति को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है।  

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पैंगोंग झील - फोटो : Social media
इस झील का पानी इतना खारा है कि इसमें मछली या फिर अन्य कोई जलीय जीवन है ही नहीं। हालांकि कई प्रवासी पक्षियों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल जरूर है। इस झील का औसत तापमान माइनस 18 डिग्री से माइनस 40 डिग्री के बीच बना रहता है। माना जाता है कि यह झील दिन में कई बार अपना रंग बदलती है, जिसके पीछे की वजह पानी में आयरन की मौजूदगी बताई जाती है। 

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पैंगोंग झील - फोटो : Social media
बताया जाता है कि 1962 के युद्ध के दौरान यही वो जगह थी, जहां से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने भी चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेजांग ला से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था। पिछले कुछ सालों में चीन ने पैंगोंग झील के अपनी ओर के किनारों पर सड़कों का निर्माण भी किया है। 
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पैंगोंग झील - फोटो : Social media
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह झील यक्ष राज कुबेर का मुख्य स्थान है। माना जाता है कि भगवान कुबेर की 'दिव्य नगरी' इसी झील के आसपास कहीं स्थित है। इसका उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता है। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो शायद ही कोई बता पाए।  
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