प्रतीकात्मक तस्वीर
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इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के भूगर्भशास्त्री मथिया विलबोल्ड का कहना है कि इस तर्क पर इतनी आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता था इसलिए विज्ञान को इसकी विवेचना करनी पड़ी। विलबोल्ड का कहना है, 'सिद्धांत यह है कि धरती के मुख्य हिस्से के गठन के बाद उल्का पिंडों की बौछार हुई जो धरती से टकराए। इन उल्का पिंडों में कुछ मात्रा में सोना था और इसने धरती के बाहरी सतह को सोने से भर दिया।' विलबोल्ड ने कहा कि यह सिद्धांत उल्का पिंडों की गतिविधियों से मेल खाता है, जैसा कि वैज्ञानिक समझते हैं। यह घटना करीब 3.8 अरब साल पहले घटी होगी।