फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Science News: आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? जानकर हो जाएंगे हैरान

Sun, 24 Aug 2025 07:16 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Science News: तारों का निर्माण अंतरिक्ष में पाई जाने वाली विशाल निहारिकाओं से होता हैं। इन निहारिकाओं को अक्सर नेबुला भी कहा जाता है। इनके भीतर विशाल मात्रा में गैस, धूल कण, हाइड्रोजन और हिलियम गैस पाए जाते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? - फोटो : Adobe Stock
Science News: रात को आसमान में तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं। तारों को आकाश में जगमगाते देखना एक अलग अनुभव होता है। रात्रि में तारों को एकांत बैठकर देखने पर ब्रह्मांड और अस्तित्व के साथ हमारे अंतरजोड़ का एहसास होता है। इन तारों को देखते हुए कई बार यह सवाल जरूर मन में आता है कि आखिर ये बनते कैसे हैं? इन विशालकाय तारों का निर्माण कैसे होता है? वह कौन-कौन सी चीजें होती हैं, जो तारों को बनाने का काम करती हैं। आज हम बताएंगे आखिर दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे बनते कैसे हैं?

तारों का निर्माण अंतरिक्ष में पाई जाने वाली विशाल निहारिकाओं से होता हैं। इन निहारिकाओं को अक्सर नेबुला भी कहा जाता है। इनके भीतर विशाल मात्रा में गैस, धूल कण, हाइड्रोजन और हिलियम गैस पाए जाते हैं। इन्हीं नेबुला के भीतर से तारों का जन्म होता है। तारों के बनने की प्रक्रिया यहीं से शुरू होती है। सर्वप्रथम नेबुला के भीतर पाए जाने वाले कण गुरुत्वाकर्षणीय खिंचाव से नजदीक आते हैं और एक गैसीय गोले का निर्माण करते हैं। 
 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? - फोटो : Adobe Stock
गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव इतना अधिक होता है कि इससे गैसीय गोले का तापमान बढ़ने लगता है और वह तेजी से घूमने लगता है। तारों के बनने का यह प्रथम चरण होता है। इस चरण तक तारे का जहां तक विकास होता है, उसे प्रोटोस्टार कहा जाता है। गुरुत्वाकर्षणीय खिंचाव के चलते प्रोटोस्टार और भी ज्यादा धूल और गैस को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जब तक तारे का कोर उप्युक्त मात्रा में द्रव्यमान को इकठ्ठा नहीं कर लेता है। 
 
विज्ञापन

3 of 5
आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? - फोटो : Adobe Stock
द्रव्यमान अधिक होने से प्रोटोस्टार के भीतर इतनी ज्यादा सघनता आ जाती है कि उसका कोर बड़ी मात्रा में दबाव और तापमान को पैदा करता है। इसके बाद प्रोटोस्टार अपने भीतर से हाइड्रोजन को फ्यूज करता है, जिसके चलते उसके अंदर नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया होने लगती है। नाभिकीय संलयन होने के बाद हाइड्रोजन के दो अणु मिलकर हिलियम का एक अणु बनाने लगते हैं।

Most Dangerous Dogs: दुनिया के सबसे खतरनाक कुत्ते, किसी की पलभर में ले सकते हैं जान

4 of 5
आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? - फोटो : Adobe Stock
इस कारण प्रोटोस्टार के भीतर से भारी मात्रा में ऊर्जा और प्रकाश बाहर निकलता है। इससे तारा ब्रह्मांड में चमकने लगता है और अंतरिक्ष में एक नए पूर्ण विकसित तारे का जन्म होता है। इसके अलावा अब तारे के चारों ओर एक प्लाज्मा की परत भी आ जाती है।

Dogs: हजारों साल पहले ही इंसानों के अच्छे दोस्त बन गए थे कुत्ते, जानिए क्या कहता है इतिहास
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आखिर कैसे बनते हैं दूर आकाश में ये टिमटिमाते तारे? - फोटो : Adobe Stock
आज हम जितने भी तारों को अंतरिक्ष में देखते हैं, उन सभी का निर्माण इसी प्रक्रिया से हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरिक्ष में स्थापित कुछ ऐसे नेबुला हैं, जिनसे कई सारे तारों का निर्माण होता है। इनमें द पिलर ऑफ क्रिएशन नेबुला, कैट आई नेबुला, हेलिक्स नेबुला आदि शामिल हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें