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Space News: सौर मंडल के बाहर ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत? ये है ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य

Wed, 19 Jan 2022 04:33 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत - फोटो : Pixabay
हमारे सौर मंडल के बाहर करीब 5000 ग्रह हैं। वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि हाल के दिनों में किए गए शोध में पता चला है कि अनुमान से ज्यादा ग्रह अतंरिक्ष में घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अंतरिक्ष में भटक रहे ग्रह बर्फीले 'फ्री-फ्लोटिंग प्लैनेट' या एफएफपी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वह यह बता सकते हैं ये ग्रह कैसे बनते हैं और कैसे समाप्त होते हैं। 

वैज्ञानिकों ने बताया है कि रिसर्च करने के लिए ज्यादा से ज्यादा एक्सोप्लैनेट को खोजने से पता चला कि आखिर यह ग्रह क्या हैं। उनका कहना है कि ग्रहों और 'ब्राउन ड्वार्फ्स' के बीच वाली रेखा तेजी से धुंधली होती चली गई है। ऐसे ठंडे तारों को ब्राउन ड्वार्फ्स कहते हैं जो हाइड्रोजन को फ्यूज नहीं कर पाते। बहुत समय तक यह चर्चा का विषय रहा कि आखिर कोई चीज ग्रह है या ब्राउन ड्वार्फ्स। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने और क्या-क्या बताया है। 
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ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत - फोटो : iStock

कैसे पैदा होते हैं ग्रह

सौर मंडल से बाहर करीब आधे तारे और ब्राउन ड्वार्फ्स मौजूद हैं। दूरबीन तकनीक में सुधार होने की वजह से अंतरिक्ष में छोटी और अलग रह रहीं वस्तुओं को देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वास्तव में अभी यह नहीं पता चला है कि आखिर ये कैसे बनते हैं। उन्होंने बताया है कि अंतरिक्ष में धूल और गैस के एक क्षेत्र के अपने आप गिरने से तारे और 'ब्राउन ड्वार्फ का निर्माण होता है। इस क्षेत्र के सघन होने की वजह गुरुत्वाकर्षण की प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा सामग्री उस पर गिरती है। 
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ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत - फोटो : iStock

परमाणु संलयन की शुरुआत करने के लिए गैस का यह गोला गर्म होता रहता है। लेकिन इनका आकार फ्यूजन शुरू करने लायक नहीं होता। शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि ऐसे ग्रह किसी तारे के चारों ओर कक्षा में जीवन की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि किसी बिंदु पर अंतरताराकीय जगह से अलग हो जाता है।
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ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत - फोटो : iStock

अपेक्षाकृत छोटे और ठंडे होने की वजह से ऐसे ग्रहों का पता लगाना कठिन होता है। आंतरिक ऊष्मा का स्त्रोत नष्ट होने की प्रक्रिया में बची ऊर्जा से उनका निर्माण हुआ है। ग्रह जितने छोटे होते हैं वह उतनी ही तेजी से ऊष्मा विकिरित करते हैं। अंतरिक्ष में ठंडी वस्तुओं से कम प्रकाश उत्सर्जित होता है और जिनसे प्रकाश उत्सर्जित होता है वह लाल रंग के होते हैं। 
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