शाहजहां
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शाहजहां की होली
शाहजहां के दौर में होली उस जगह पर मनाई जाती थी, जहां आज राजघाट है। होली के दिन शाहजहां प्रजा के साथ रंग खेलते थे। बहादुर शाह जफर, तो इसमें और आगे निकल गए और उन्होंने होली को लाल किले का शाही उत्सव बना दिया। इस त्योहार को लेकर जफर ने गीत भी लिखे, जिसे होरी नाम दिया गया। जफर का लिखा एक होरी गीत यानी फाग आज भी होली पर खूब गाया जाता है, 'क्यों मो पे रंग की मारी पिचकारी, देखो कुंवरजी दूंगी मैं गारी।'