फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीन थैरेपी से 25 फीसदी बढ़ा दी चूहों की उम्र, अब इंसानों पर होगा ट्रायल

Fri, 22 Jan 2021 09:30 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हर किसी की ये चाहत होती है कि वो काफी दिनों तक जवान ही रहें। बूढ़ा होना किसी को भी अच्छा नहीं लगता है। इसी बीच चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जीन थैरेपी का ईजाद की है, जिसकी वजह से वो बुढ़ापे को काफी समय तक रोका जा सकता है। यानी इस थैरेपी से आपकी जिंदगी थोड़ी लंबी हो जाएगी और आप जवान नजर आएंगे। वैज्ञानिकों ने इस थैरेपी को चुहों पर इस्तेमाल कर उनकी जिंदगी 25 फीसदी बढ़ा दी। तो आइए जानते हैं इस थैरेपी के बारे में विस्तार से...
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भविष्य में इस थैरेपी के इस्तेमाल से इंसानों के उम्र बढ़ाने, अधिक दिन तक जवान रहने या बुढ़ापे से संबंधित बीमारियों को ठीक करने में मदद लिया जा सकता है। वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद की गई इस नई थैरेपी को लेकर साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में एक रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जीन थैरेपी में kat7 नाम के जीन को असक्रिय किया जाता है। क्योंकि कोशिकाओं के बूढ़े होने में यही जीन जिम्मेदार है।
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (Chinese Academy of Sciences - CAS) के इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के प्रोफेसर कू जिंग और उनकी टीम ने इस नई जीन थैरेपी को विकसित किया है। बता दें कि प्रोफेसर कू जिंग एजिंग और रीजेनेरेटिव मेडिसिंस के विशेषज्ञ हैं। कू जिंग के मुताबिक, उन्होंने इस नई थैरेपी को चूहों पर अजमाया। इस नई थैरेपी से चूहों में 6 से 8 महीने के बाद बदलाव दिखने लगा। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस थैरेपी से चूहों की जिंदगी में 25 फीसदी का इजाफा हो गया।

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इंसानों के शरीर में kat7 जीन के जांच करने के लिए कई तरह के परमिशन चाहिए होंगे, लेकिन उससे पहले हमें इस थैरेपी को इस स्तर तक सुरक्षित करना होगा कि किसी भी इंसान को नुकसान ना हो। एक बार यह थैरेपी इंसानों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित साबित हो जाएगी, तो इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अगर कुछ सालों में इस थैरेपी को विकसित कर इंसानों के लिए उपयोग में लाया जाएगा, तो इससे बुढ़ापे से संबंधित बीमारियों का इलाज करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही इंसान ज्यादा दिन तक जवान रहेंगे, तो उससे अधिक दिन तक काम लिया जा सकेगा। लेकिन इससे पहले इस थैरेपी पर काफी रिसर्च की आवश्यकता जताई गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें