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G20 Summit: भारत मंडपम में लगी है नटराज की प्रतिमा, जानिए क्या है खासियत और चोल साम्राज्य से संबंध?

Sat, 09 Sep 2023 12:35 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter
G20 Summit in India: जी 20 के कार्यक्रम के लिए प्रगति मैदान के भारत मंडपम को बेहद खूबसूरत सजाया गया है। भारत मंडपम में लगाई गई नटराज की प्रतिमा ने सभी की ध्यान अपनी तरफ खींचा है। नटराज की यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है और दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ति है। नटराज को भगवान शिव का रूप माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव इस रूप में तांडव नृत्य की एक मुद्रा में हैं। यह मूर्ति 27 फीट ऊंची और 18 टन वजनी है। 

क्या है मूर्ति की खासियत

तमिलनाडु के स्वामी मलाई के प्रसिद्ध मूर्तिकार राधाकृष्णन स्थापति और उनकी टीम ने नटराज की इस मूर्ति को बनाया है। चोल साम्राज्य के समय से राधाकृष्णन के पूर्वज मूर्तियां बनाते आ रहे हैं। 18 टन वजनी यह मूर्ति अष्टधातु- कॉपर, जिंक, लीड, टिन, सिल्वर, गोल्ड, मरकरी और आयरन से बनाई गई है। इसको बनाने में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। दावा है कि अष्टधातु से बनी यह दुनिया की सबसे ऊंची नटराज की मूर्ति है। 
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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter@ignca_delhi
जानिए कैसे बनाई गई

इस मूर्ति का 'लॉस्ट वैक्स मेथड' से निर्माण किया गया है। इस विधि से चोल साम्राज्य में भी मूर्तियों को बनाया जाता था। लॉस्ट-वैक्स मेथड को छह हजार साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। सदियों तक लॉस्ट वैक्स मेथड से धातु की मूर्तियां बनाई जाती रहीं। चोल साम्राज्य में इस मेथड का खूब इस्तेमाल किया गया था।
 
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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेथड के तहत सबसे पहले वैक्स यानी मोम का मॉडल तैयार किया जाता है। फिर इसको कावेरी नदी के तट की खास मिट्टी से कवर करते हैं। कई बार इस तरह किया जाता है। इसके बाद जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाती है, तो फिर मोम को पिघलाया जाता है। जब अंदर का मोम पिघल जाता है और फिर एक खोखला खाका तैयार होता है। इसके बाद इस खोखले ढांचे को पिघली हुई धातु से भरा जाता है। 
 

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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत मंडपम में लगाई गई नटराज की मूर्ति थिल्लई नटराज मंदिर, उमा माहेश्वरार मंदिर और बृहदेश्वर मंदिर में स्थापित मूर्तियों से प्रेरित है। इन तीनों मंदिरों का चोल साम्राज्य में 9वीं से 11वीं सदी के बीच निर्माण किया गया था। चोल साम्राज्य का इस दौरान भारत के एक बड़े इलाके तक शासन था। चोल साम्राज्य में कला और संस्कृति को बहुत बढ़ावा मिला।



 
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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter
माना जाता है कि चोल भगवान शिव के कट्टर भक्त थे। उन्होंने अपने शासन के दौरान भगवान शिव के कई मंदिरों का निर्माण कराया, लेकिन पहली बार पांचवीं सदी में नटराज के रूप में भगवान शिव की मूर्ति बनाई गई थी। वर्तमान में नटराज की जो मूर्ति दिखती हैं, वो चोलों के साम्राज्य में ही बनाई गई थीं। चोलों ने ही नटराज की तांबे की मूर्तियां बनवाई थीं। 

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nataraja statue in bharat mandapam - फोटो : Twitter

चोल साम्राज्य सबसे शक्तिशाली राजवंश में से एक है। दक्षिण भारत से लेकर आसपास के देशों तक चोलों का साम्राज्य था। विजयालय ने चोल साम्राज्य की स्थापना की थी। विजयालय ने 8वीं सदी में पल्लवों को हरा दिया था और तंजौर साम्राज्य पर कब्जा कर लिया था। विजयालय के उत्तराधिकारियों ने पड़ोसी क्षेत्रों को जीत लिया और चोलों का इलाका और शक्ति बढ़ती चली गई।
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