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आखिर फिनलैंड वायुसेना के प्रतीक चिन्ह से क्यों हटाया गया स्वास्तिक?

Tue, 07 Jul 2020 03:03 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिनलैंड वायुसेना का प्रतीक चिन्ह - फोटो : सोशल मीडिया
फिनलैंड की वायुसेना ने स्वास्तिक को अपने प्रतीक चिन्ह से हटा दिया है। दो पंखों के साथ स्वास्तिक का निशान वहां की वायुसेना कमांड का प्रतीक था। दशकों से फिनलैंड की वायुसेना इस चिन्ह का इस्तेमाल कर रही थी लेकिन इसे हिटलर की नाजी सेना और उसकी क्रूरता के साथ जोड़कर देखा जाता था। हालांकि स्वास्तिक का इतिहास हजारों साल पुराना है। वायुसेना ने बिना किसी घोषणा के इस चिन्ह का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इस बदलाव पर सबसे पहले हेलसिंकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तेइवो तैवैने ने गौर किया।
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फिनलैंड वायुसेना - फोटो : सोशल मीडिया
फिनलैंड की आजादी के बाद, साल 1918 में फिनिश वायुसेना का गठन हुआ था, तभी से वो स्वास्तिक का इस्तेमाल कर रहे थे। ये हिटलर की नाजी सेना से बहुत पहले का दौर था। साल 1945 तक सफेद बैंकग्राउंड पर नीले स्वास्तिक का चिन्ह उनके हवाई जहाजों पर बनाया जाता था। फिनलैंड ने उस वक्त नाजी जर्मनी का साथ दिया था, लेकिन इस प्रतीक का उद्देश्य नाजी के प्रति समर्थन दिखाना नहीं था।
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फिनलैंड वायुसेना का प्रतीक चिन्ह - फोटो : सोशल मीडिया
फिनिश वायुसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्वास्तिक को हवाई जहाजों से हटा दिया गया लेकिन वायुसेना के कुछ यूनिट ने प्रतीक चिन्हों के तौर पर, झंडों या सजावट के लिए और वर्दियों पर इसका इस्तेमाल जारी रखा गया। जनवरी 2017 से ही वायुसेना कमांड का प्रतीक चिन्ह वायुसेना के सर्विस प्रतीक चिन्ह से मिलता जुलता है – एक सुनहरे चील के साथ पंखों का एक चक्र।

प्रवक्ता ने बताया, “यूनिट के प्रतीक चिन्ह को वर्दियों पर पहना जाता है। पुराने प्रतीक का उपयोग जारी रखना अव्यावहारिक और अनावश्यक माना जाता रहा था, जो समय-समय पर गलतफहमी पैदा करता था।”

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स्वास्तिक - फोटो : सोशल मीडिया
स्वास्तिक का इतिहास
स्वास्तिक संस्कृत से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ भलाई या अच्छा भाग्य होता है। हजारों सालों से भारत समेत दुनिया की कई सभ्यताएं स्वास्तिक का इस्तेमाल करती आ रही हैं। 20वीं सदी में स्वास्तिक पश्चिमी फैशन का भी हिस्सा बन गया था। 1920 में अडोल्फ हिटलर ने स्वास्तिक को अपनी नेशनल सोशलिस्ट पार्टी का चिन्ह बनाया। हिटकर की क्रूरता और नरसंहार के कारण स्वास्तिक को पश्चिम के देशों में नाजीवाद और यहूदी विरोधी चिन्ह के तौर पर देखा जाने लगा।
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हेलसिंकी विश्वविद्यालय - फोटो : सोशल मीडिया
हेलसिंकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तेइवो तैवैने ने बीबीसी को बताया कि स्वास्तिक का निशान साल 1920 के आसपास फिनलैंड में डेटिंग से जुड़ी इमारतों पर भी देखा जा सकता था। वो बताते हैं, “फिनलैंड में इसे एक सजावट का चिन्ह मानते हैं, कुछ हद तक ये वही है भी।”

साल 1889 में अक्सेले-गैलेन-कैल्लेला नाम के एक मशहूर फिनिश चित्रकार ने अपनी पेंटिग में स्वास्तिक का इस्तेमाल किया था। उन्होंने इसका इस्तेमाल फिनलैंड की ऑर्डर ऑफ द क्रास ऑफ लिबर्टी के डिजाइन में भी किया। उन्होंने बहुत छोटे हुक के साथ एक क्रॉस का उपयोग किया, इसलिए नाजी के चिन्ह से ये ज्यादा मेल नहीं खाता। फिनलैंड के राष्ट्रपति के झंडे में भी इसी चिन्ह का इस्तेमाल होता है।
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फिनलैंड वायुसेना - फोटो : सोशल मीडिया
फिनिश वायुसेना तक कैसे पहुंचा स्वास्तिक?
स्वस्तिक को फिनिश वायु सेना तक स्वीडन के एक सम्मानित व्यक्ति ने पहुंचाया जिनका नाम एरिक वॉन रोजेन था। वो स्वास्तिक का इस्तेमाल एक ‘गुड लक चार्म’ यानि खुद के लिए भाग्यशाली प्रतीक की तरह करते थे। उन्होंने 1918 में अपने नए स्वतंत्र पड़ोसी देश को एक विमान भेंट किया जिसपर पर नीले रंग का स्वस्तिक अंकित था। यह ‘थुलिन टाइप डी’ विमान फिनिश वायु सेना का पहला विमान था। इसके बाद 1945 तक सभी विमानों में उनका नीला स्वस्तिक चिन्ह बनाया जाने लगा।
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फिनलैंड वायुसेना का प्रतीक चिन्ह - फोटो : सोशल मीडिया
प्रतीक के इस्तेमाल का समर्थन करने वाले लोगों का तर्क है कि 1918 में नाजी नहीं थे, इसलिए वायु सेना के स्वस्तिक को नाजीवाद से जोड़कर देखना गलत है। एरिक वॉन रोजेन ने जब 1918 में उपहार दिया था, उस वक्त कोई नाजी संघ नहीं था। हालांकि 1930 के दशक में वो स्वीडन में नेशनल सोशलिस्ट मूवमेंट का एक मुख्य चेहरा बनकर सामने आए थे। वह वरिष्ठ जर्मन नाजी हरमन गोरिंग के बहनोई भी थे। प्रोफेसर तैयिवो तैवैने के मुताबिक वो हिटलर के अच्छे मित्र भी थे। फिनिश वायु सेना ने कहा है कि वॉन रोसेन का प्रतीक होने के नाते, स्वस्तिक कुछ वायु सेना इकाई के झंडों और सजावटों का हिस्सा बना रहेगा लेकिन केंद्रीय वायु सेना कमांड का हिस्सा नहीं रहेगा।
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प्रोफेसर तैवेने - फोटो : सोशल मीडिया
प्रोफेसर तैवेने ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने कभी यह तर्क नहीं दिया था कि फिनलैंड में स्वस्तिक को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए (जैसा कि जर्मनी में किया गया है)। लेकिन उन्होंने कहा कि सेना का कर्तव्य "राष्ट्र की रक्षा करना है - 1918 में दिए गए पुराने प्रतीक की रक्षा करना नहीं जिसे किसी स्वीडिश ने दिया है।” वह चिंतित थे कि यह फिनलैंड के युवाओं का सेना के प्रति रवैये को प्रभावित कर सकता है। फिनलैंड का विशाल पड़ोसी रूस भी ये समझ सकता है फिनलैंड अभी तक उसका शत्रु है। अगर फिनलैंड पर कभी खतरा हो तो ये सोच पड़ोसी देशों के समर्थन देने के फैसले पर असर डाल सकती है।

फिनिश एयर फोर्स अकादमी के प्रतीक में अभी भी स्वस्तिक का चिन्ह है जिसके साथ पंख लगे हुए हैं। केंद्रीय एयरफोर्स कमांड से स्वास्तिक के चिन्ह को अचानक से हटा देना ये दर्शाता है कि सेना के उच्च अधिकारी वॉन रोजेन के नीले और सफेद स्वास्तिक से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
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